Advertisements
Advertisements
प्रश्न
रहीम ने अपने दोहों में छोटी वस्तुओं का महत्त्व प्रतिपादित किया है। इसे सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
Advertisements
उत्तर
कवि रहीम को लोक जीवन का गहरा अनुभव था। वे इसी अनुभव के कारण जीवन के लिए उपयोगी वस्तुओं की सूक्ष्म परख रखते थे। उन्होंने अपने दोहे में मनुष्य को सीख दी है कि वह बड़े लोगों का साथ पाकर छोटे लोगों की उपेक्षा और तिरस्कार न करें, क्योंकि छोटे लोगों द्वारा जो कार्य किया जा सकता है, वह बड़े लोग उसी प्रकार नहीं कर सकते हैं; जैसे सुई की सहायता से मनुष्य जो काम करता है उसे तलवार की सहायता से नहीं कर सकता है। सुई और तलवार दोनों का ही अपनी-अपनी जगह महत्त्व है।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
जीवन संघर्षमय है, इससे घबराकर थमना नहीं चाहिए’ इससे संबंधित अन्य कवियों की कविताओं को एकत्र कर एक एलबम बनाइए।
‘अग्नि पथ’ का प्रतीकार्थ स्पष्ट कीजिए।
‘अग्नि पथ’ का प्रतीकार्थ स्पष्ट कीजिए।‘अग्नि पथ’ कविता में निहित संदेश अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।
जीवन पथ पर चलते मनुष्य के कदम यदि रुक जाते है तो उसे क्या हानि हानि उठानी पड़ती है?
निम्नलिखित उदाहरण में 'वाक्य-विचलन'को समझने का प्रयास कीजिए। इसी आधार पर प्रचलित वाक्य-विन्यास लिखिए :
उदाहरण: तट पर एक गुलाब सोचता
एक गुलाब तट पर सोचता है।
शुकी बैठ अंडे है सेती
निम्नलिखित पंक्ति का आशय स्पष्ट करते हुए उनका अर्थ-सौंदर्य बताइए −
पापी ने मंदिर में घुसकर
किया अनर्थ बड़ा भारी
महामारी अपना प्रचंड रूप किस प्रकार दिखा रही थी?
सुखिया का पिता किस सामाजिक बुराई का शिकार हुआ?
महामारी से सुखिया पर क्या प्रभाव पड़ा? इससे उसके पिता की दशा कैसी हो गई?
सुखिया के पिता को मंदिर में देखकर भक्तों ने क्या-क्या कहना शुरू कर दिया?
इस कविता का कौन-सा भाग आपको सबसे अच्छा लगा और क्यों?
आदमी की प्रवृतियों का उल्लेख कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए :
एक को साधने से सब कैसे सध जाता है?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए :
अवध नरेश को चित्रकूट क्यों जाना पड़ा?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए :
'मोती, मानुष, चून' के संदर्भ में पानी के महत्व को स्पष्ट कीजिए।
कुछ मनुष्य पशुओं से भी हीन होते हैं। पठित दोहे के आधार पर हिरन के माध्यम से स्पष्ट कीजिए।
रहीम ने मूल को सींचने की सीख किस संदर्भ में दी है और क्यों?
नीचे लिखी पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए :
जाकी जोति बरै दिन राती
जैसे चितवत चंद चकोरा’ के माध्यम से रैदास ने क्या कहना चाहा है?
