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निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए- ‘रूप की तो बात ही क्या है! बलिहारी है इस मादक शोभा की। चारों ओर कुपित यमराज के दारुण निःश्वास के समान धधकती लू में यह हरा भी है

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प्रश्न

निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-

‘रूप की तो बात ही क्या है! बलिहारी है इस मादक शोभा की। चारों ओर कुपित यमराज के दारुण निःश्वास के समान धधकती लू में यह हरा भी है और भरा भी है, दुर्जन के चित्त से भी अधिक कठोर पाषाण की कारा में रुद्ध अज्ञात जलस्रोत से बरबस रस खींचकर सरस बना हुआ है।’

सविस्तर उत्तर
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उत्तर

प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित निबंध “कुटज” से ली गई हैं। इस निबंध में लेखक ने कुटज की विशेषताओं का वर्णन किया है।

व्याख्या: प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक ने कुटज की सुंदरता के बारे में लिखा है। लेखक का कहना है कि कुटज का वृक्ष देखने में अत्यंत सुंदर होता है। यदि हम उसके आसपास के वातावरण को देखें तो चारों ओर भीषण गर्मी प्रतीत होती है, मानो यमराज का श्वास चल रहा हो। कुटज का वृक्ष भी गर्म वातावरण में स्थित होता है, फिर भी वह झुलसता नहीं है। यह वृक्ष हरियाली से आच्छादित रहता है और फल भी देता है। यह पत्थरों के बीच से अपनी जड़ों के लिए मार्ग बना लेता है। लेखक कहते हैं कि कुटज का पेड़ अपने जीवन के लिए हर कठिन परिस्थिति से संघर्ष करता है और सिर उठाकर जीता है।

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कुटज
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पाठ 2.08: हजारी प्रसाद द्विवेदी (कुटज) - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ १३७]

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एनसीईआरटी Hindi Antara Bhag 2 [English] Class 12
पाठ 2.08 हजारी प्रसाद द्विवेदी (कुटज)
प्रश्न-अभ्यास | Q 10. (ग) | पृष्ठ १३७

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निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-

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निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-

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निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-

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कुटज को ‘गाढ़े का साथी’ क्यों कहा गया है?


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