Advertisements
Advertisements
प्रश्न
निम्न मुद्दों के आधार पर विज्ञापन लिखो :
स्थल/जगह, संपर्क, पुस्तक मेला, दिनांक, समय
Advertisements
उत्तर
|
रिषभ पुस्तक मेला रिषभ पुस्तक मेले में आइए, बच्चे, जवान, बूढ़े व महिलाओं के लिए विभिन्न भाषाओंव विभिन्न विषयों की पुस्तकें उपलब्ध रिषभ पुस्तक मेले का सात दिनों का आनंद उठाइए। स्थल - जंतर मंतर मैदान दिनांक - २ जून, २०१९ से ३ जुलाई, २०१९ तक समय - सुबह ०९.०० से शाम ०७.०० बजे तक संपर्क - ८७७००००००० ई-मेल आईडी - [email protected] |
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
किसी मौलिक मराठी विज्ञापन का हिंदी में अनुवाद करो।
मैंने समझा गाँव-शहर कविता से
‘आगे कुआँ पीछे खाई’ कहावत का अर्थ लिखकर उससे संबंधित कोई प्रसंग लिखो।
‘हाफ मैराथन’ में सफलता प्राप्त करने के लिए कौन-कौन-सी तैयारियाँ करोगे, लिखो।
निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर कहानी लिखकर उसे उचित शीर्षक दो।



यदि मैं अंतरिक्ष यात्री बन जाऊँ तो ....

चित्र पहचानकर उनके नाम लिखो:

____________
।। हे विश्वचि माझे घर ।।
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की आत्मकथा का अंश पढ़कर चर्चा करो।
विद्यालय के स्नेह सम्मेलन का वर्णन करो।
यदि समय का चक्र रुक जाए तो ......
।। जीवदया ही भूतदया है ।।
नीचे दिए गए राष्ट्रीय प्रतीक का चित्र देखो और उनका नाम लिखो:

चित्रवाचन करके अपने शब्दों में कहानी लिखो और उचित शीर्षक बताओ:






दिए गए विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :-
डिजिटल युग और मैं
निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:
| “कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं। |
आपके विद्यालय की सैर का वर्णन करने वाला पत्र अपनी सहेली/अपने मित्र को लिखिए: (पत्र निम्न प्रारूप में हो।)

