मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता ६ वी

।। हे विश्वचि माझे घर ।। - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

।। हे विश्वचि माझे घर ।।

टीपा लिहा
Advertisements

उत्तर

मराठी में लिखी इस उक्ति के लिए संस्कृत में एक उक्ति है– 'वसुधैव कुटुंबकम्' अर्थात संपूर्ण विश्व ही मेरा घर है। बोली-भाषा, जाति-धर्म, रंग, संस्कृति, सरहद आदि के आधार पर हम भले ही अलग-अलग हों, पर सबसे पहले हम इंसान हैं। विश्व के प्रत्येक व्यक्ति को एक-दूसरे की आवश्यकता है। ऐसे में भेदभाव की दीवार को तोड़कर हम सभी को एक होना चाहिए।

shaalaa.com
उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 1.07: मेरा अहोभाग्य - मेरा अहोभाग्य [पृष्ठ १७]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Sulabhbharati [English] Standard 6 Maharashtra State Board
पाठ 1.07 मेरा अहोभाग्य
मेरा अहोभाग्य | Q (११) | पृष्ठ १७

संबंधित प्रश्‍न

‘सड़क दुर्घटनाएँ : कारण एवं उपाय’ निबंध लिखो।



।। सत्यमेव जयते ।।


चित्र पहचानकर उनके नाम लिखो:

____________


।। ईमानदारी चरित्र निर्माण की नींव है ।।


संतुलित आहार पर पॉंच वाक्य बोलो।


विलुप्त होते हुए प्राणियों तथा पक्षियों की जानकारी प्राप्त करके सूची बनाओ।


निम्नलिखित विषय पर 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए -

परीक्षा के दिन


निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:

“कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए 'असंभव', 'गंदा' या 'नीचा' शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।'' ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।'' मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है ? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और 'निर्मल हृदय' जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं।

आपके विद्यालय की सैर का वर्णन करने वाला पत्र अपनी सहेली/अपने मित्र को लिखिए: (पत्र निम्‍न प्रारूप में हो।)


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×