Advertisements
Advertisements
प्रश्न
मैदान में या स्कूल में किसी खुली जगह पर सब बच्चे इकट्टे हो जाओ। अब नीचे दी गई स्थितियों में तुम कैसे चलोगे, करके दिखाओ।
- अगर ज़मीन एकदम गुलाब की पंखुड़ियों जैसी हो।
- अगर ज़मीन काँटों-भरे मैदान में बदल गई हो और आस-पास ऊँची-ऊँची घास हो।
- अगर ज़मीन ठंडी-ठंडी बर्फ से ढँक गई हो।
क्या हर बार तुम्हारी चाल बदली? चर्चा करो।
Advertisements
उत्तर
-
ऐसे ज़मीन पर चलना काफी अच्छा लगेगा।
-
ऐसी ज़मीन पर चलना काफी कठिन है। चलने के समय ध्यान से चलना होगा ताकि काँटे न चुभ जायें।
-
इस स्थिति में मैं छोटे छोटे कदमों से काफी ध्यान से चलूँगा, क्योंकि ऐसी जगह काफी फिसलन भरी होगी।
हाँ, हर बार अलग स्थिति में मेरी चाल बदली।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
कुछ ईंटें लो। इन्हें किसी खुली जगह पर सीधी लाइन में रखो, जैसे चित्र में दिखाया गया है। अब इन पर चलने की कोशिश करो। क्या यह आसान लगा?

चित्र 1 और 2 को देखो। बच्चे कुँए से बाल्टी खींच रहे हैं।

- क्या दोनों चित्रों में अंतर बता सकते हो?
- इन दोनों में से किस तरह से खींचना आसान होगा – पुली (घिरनी) के साथ या बिना पुली के?
तुम भी चरखी या खाली धागे की रील से पुली बनाकर कुछ सामान उठाने की कोशिश करो।


अंदाज़ा लगाओ, इस पुल को एक समय पर कितने लोग पार कर सकते हैं?

तुमने देखा कैसे बच्चे अलग-अलग पुलों की मदद से उबड़-खाबड़ रास्ते और नदियों को पार करके स्कूल पहुँचते हैं।

अपने दादा-दादी से पता करो कि उनके बचपन के समय में पुल कैसे होते थे?

क्या तुम बता सकते हो, इसे ‘जुगाड़’ क्यों कहते हैं?

क्या तुमने इतनी ज़्यादा बर्फ़ देखी है? कहाँ? फ़िल्मों में या कहीं और?
क्या सज़ा देना ही गलत काम के सुधार का तरीका है? स्कूल के लिए ऐसे नियम बनाओ, जिससे बिना सज़ा के स्कूल में सुधार हो।
अपने ‘सपनों के स्कूल’ का चित्र कॉपी में बनाओ और कक्षा में उस पर अपने साथियों से बात-चीत करो।
