मराठी

‘कन्यादान’ कविता में शाब्दिक भ्रम किसे और क्यों कहा गया है? - Hindi Course - A

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

‘कन्यादान’ कविता में शाब्दिक भ्रम किसे और क्यों कहा गया है?

टीपा लिहा
Advertisements

उत्तर

‘कन्यादान’ कविता में वस्त्र और आभूषणों को शाब्दिक भ्रम इसलिए कहा गया है क्योंकि स्त्रियाँ सुंदर वस्त्र व सुंदर आभूषणों की चमक व लालच में भ्रमित होकर आसानी से अपनी स्वतंत्रता खो देती हैं। ये स्त्री जीवन के लिए बंधने का काम करते हैं। वस्तुतः समाज वस्त्र और आभूषणों की बेड़ियों में जकड़कर स्त्री के अस्तित्व को सीमाओं में बाँध देता है, वह मानसिक रूप से हर बंधन स्वीकारते हुए जुल्मों का शिकार होती है।

shaalaa.com
कन्यादान
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
2021-2022 (March) Delhi Set 1

संबंधित प्रश्‍न

'आग रोटियाँ सेंकने के लिए है।

जलने के लिए नहीं'

(क) इन पंक्तियों में समाज में स्त्री की किस स्थिति की ओर संकेत किया गया है?

(ख) माँ ने बेटी को सचेत करना क्यों ज़रूरी समझा?


माँ को अपनी बेटी 'अंतिम पूँजी' क्यों लग रही थी?


माँ ने बेटी को क्या-क्या सीख दी?


आपकी दृष्टि में कन्या के साथ दान की बात करना कहाँ तक उचित है?


वैवाहिक संस्कार में कन्यादान खुशी का अवसर माना जाता है, पर यहाँ माँ दुखी क्यों थी?


लड़की की माँ की चिंता के क्या कारण थे?


‘कन्यादान’ कविता में ऐसा क्यों कहा गया है कि लड़की को दुख बाँचना नहीं आता?


‘आग रोटियाँ सेंकने के लिए है जलने के लिए नहीं’ कहकर कवयित्री ने समाज पर क्या व्यंग्य किया है?


‘कन्यादान’ कविता में नारी सुलभ किन कमजोरियों की ओर संकेत किया गया है?


‘कन्यादान’ कविता में माँ द्वारा जो सीख दी गई हैं, वे वर्तमान परिस्थितियों में कितनी प्रासंगिक हैं, स्पष्ट कीजिए।


इस सत्र में पढ़ी गई किस कविता की अंतिम पंक्तियाँ आपको प्रभावित करती हैं और क्यों? तर्क सहित स्पष्ट कीजिए।


वर्तमान में ‘कन्यादान’ जैसी परंपरा के औचित्य-अनौचित्य पर अपने तर्कसंगत विचार लिखिए।


‘आग’ के विषय में माँ बेटी को क्या समझा रही है और क्यों? ‘आग’ के संकेत से कविता किस सामाजिक बुराई की ओर भी इशारा करती है? उल्लेख कीजिए।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×