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‘कन्यादान’ कविता का प्रतिपाद्य लिखिए। - Hindi Course - A

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प्रश्न

‘कन्यादान’ कविता का प्रतिपाद्य लिखिए।

टीपा लिहा
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उत्तर

‘कन्यादान’ कविता में माँ द्वारा बेटी को स्त्री के परंपरागत ‘आदर्श’ रूप से हटकर सीख दी गई है। कवि का मानना है। कि सामाजिक-व्यवस्था द्वारा स्त्रियों के आचरण संबंधी जो प्रतिमान गढ़ लिए जाते हैं वे आदर्श होकर भी बंधन होते हैं। कोमलता’ में कमजोरी का उपहास, लड़की जैसा न दिखाई देने में आदर्श का प्रतिकार है। माँ की बेटी से निकटता के कारण उसे अंतिम पूँजी कहा गया है। इस कविता में माँ की कोरी भावुकता नहीं, बल्कि माँ के संचित अनुभवों की प्रामाणिक अभिव्यक्ति है।

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कन्यादान
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पाठ 8: ऋतुराज - कन्यादान - अतिरिक्त प्रश्न

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi - Kshitij Part 2 Class 10
पाठ 8 ऋतुराज - कन्यादान
अतिरिक्त प्रश्न | Q 8

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कुछ तुकों और कुछ लयबद्ध पंक्तियों की'

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