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इस सत्र में पढ़ी गई किस कविता में कोरी भावुकता न होकर जीवन में संचित किए अनुभवों की अनिवार्य सीख है? कविता के नाम के साथ कथन की पुष्टि के लिए उपयुक्त तर्क भी प्रस्तुत कीजिए।

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प्रश्न

इस सत्र में पढ़ी गई किस कविता में कोरी भावुकता न होकर जीवन में संचित किए अनुभवों की अनिवार्य सीख है? कविता के नाम के साथ कथन की पुष्टि के लिए उपयुक्त तर्क भी प्रस्तुत कीजिए।

थोडक्यात उत्तर
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उत्तर

इस सत्र में पढ़ी गई कविता 'कन्यादान' में कोरी भावुकता न होकर जीवन में संचित किए अनुभवों की अनिवार्य सीख है। कविता के कवी 'ऋतुराज' हैं। इस कविता में स्त्री जीवन के प्रति गहरी संवेदनशीलता की अभिव्यक्ति हुई है। यह कविता नारी को अपने अस्तित्व की रक्षा करने, आत्मसम्मान की रक्षा करने तथा अपने अधिकारीयों के लिए संघर्ष करने के लिए प्रेरित करती है। कवी ने माँ की माध्यम से लड़की को यह व्यावहारिक सीख दी है कि लड़की होकर भी किसी के सामने लड़की जैसी दिखाई मत देना। माँ चाहती है कि उसकी बेटी ससुराल में जाकर सौंदर्य और वस्त्राभूषण के भ्रमजाल में न पड़े। वह मानसिक दृढ़ता का परिचय देते हुए परिस्थितियों के अनुरूप कार्य करे।

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कन्यादान
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
2021-2022 (March) Term 2 Sample

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