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‘कन्यादान’ कविता में शाब्दिक भ्रम किसे और क्यों कहा गया है?

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प्रश्न

‘कन्यादान’ कविता में शाब्दिक भ्रम किसे और क्यों कहा गया है?

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उत्तर

‘कन्यादान’ कविता में वस्त्र और आभूषणों को शाब्दिक भ्रम इसलिए कहा गया है क्योंकि स्त्रियाँ सुंदर वस्त्र व सुंदर आभूषणों की चमक व लालच में भ्रमित होकर आसानी से अपनी स्वतंत्रता खो देती हैं। ये स्त्री जीवन के लिए बंधने का काम करते हैं। वस्तुतः समाज वस्त्र और आभूषणों की बेड़ियों में जकड़कर स्त्री के अस्तित्व को सीमाओं में बाँध देता है, वह मानसिक रूप से हर बंधन स्वीकारते हुए जुल्मों का शिकार होती है।

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कन्यादान
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2021-2022 (March) Delhi Set 1

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