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प्रश्न
बहुविकल्पी प्रश्नोत्तर
कठपुतलियों को किनसे परेशानी थी?
पर्याय
गुस्से से
पाँवों से
धागों से
उपर्युक्त सभी से
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उत्तर
धागों से
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संबंधित प्रश्न
कठपुतलियाँ किसका प्रतीक हैं?
‘कठपुतली’ कविता के माध्यम से कवि क्या संदेश देना चाहता है?
इस कविता के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?
यह कविता किस वाद से प्रभावित है?
क्या आप क्रांति के समर्थक हैं? क्या क्रांति के द्वारा समाज में व्याप्त अव्यवस्था को दूर किया जा सकता है? कैसे तर्क सहित उत्तर लिखिए।
कविता की इस पंक्ति पर ध्यान दो-
"बच्चे और पेड़ दुनिया को हरा-भरा रखते हैं।"
अब तुम यह बताओ कि पेड़ों और बच्चों में क्या कुछ समानता है? उसे अपने ढंग से लिखो।
नीचे एक लकड़हारे और एक बच्ची की बातचीत दी गई है। इसे अपनी समझ से पूरा करो।
| बच्चा- | ओ भैया! आप इस पेड़ को क्यों काट रहे हो? |
| लकड़हारा- | यह तो मेरा काम है। |
| बच्ची – | पर यह तो गलत है। |
| लकड़हारा- | यह कैसे गलत है? इसी से तो मेरे परिवार का भरण-पोषण होता है। |
बच्ची __________________________________________
लकड़हारा _____________________________________
_______________________________________________
सही शब्द चुनकर वाक्य पूरा करो
| कहाँ से, किसने, क्यों, क्या, किसके, किसको |
___________ डाँट रहे हैं _________कहना नहीं सुना माँ का।
'सुख-स्वप्नों के स्वर गूँजेंगे।'
इसमें 'स' अक्षर बार-बार आया है।
तुम भी नीचे लिखे वर्णों से वाक्य बनाओ। ध्यान रखो कि उस वर्ण से शुरू होने वाले तीन शब्द तुम्हारे वाक्य में हों।
(क) क __________________
(ख) त __________________
(ग) द __________________
बताओ तुम ये काम कैसे करोगे? शिक्षक से भी सहायता लो।
नया भूगोल बनाना
यदि आपके घर के किसी स्थान पर किसी पक्षी ने अपना आवास बनाया है और किसी कारणवश आपको अपना घर बदलना पड़ रहा है तो आप उस पक्षी के लिए किस तरह के प्रबंध करना आवश्यक समझेंगे? लिखिए।
'भूखे-प्यासे' में द्वंद्व समास है। इन दोनों शब्दों के बीच लगे चिह्न को सामासिक चिह्न (-) कहते हैं। इस चिह्न से 'और' का संकेत मिलता है, जैसे-
भूखे-प्यासे = भूखे और प्यासे।
• इस प्रकार के दस अन्य उदाहरण खोजकर लिखिए।
'बहुत दिन हुए / हमें अपने मन के छंद छुए।'- इस पंक्ति का अर्थ और क्या हो सकता है? अगले पृष्ठ पर दिए हुए वाक्यों की सहायता से सोचिए और अर्थ लिखिए-
(क) बहुत दिन हो गए, मन में कोई उमंग नहीं आई।
(ख) बहुत दिन हो गए, मन के भीतर कविता-सी कोई बात नहीं उठी, जिसमें छंद हो, लय हो।
(ग) बहुत दिन हो गए, गाने-गुनगुनाने का मन नहीं हुआ।
(घ) बहुत दिन हो गए, मन का दुख दूर नहीं हुआ और न मन में खुशी आई।
कौन किस रूप में बैठा है?
इस कविता को कवि ने ‘मैं’ से आरंभ किया है- ‘मैं घमंडों में भरा ऐंठा हुआ’। कवि का यह ‘मैं’ कविता पढ़ने वाले व्यक्ति से भी जुड़ सकता है और तब अनुभव यह होगा कि कविता पढ़ने वाला व्यक्ति अपनी बात बता रहा है। यदि कविता में ‘मैं’ की जगह ‘वह’ या कोई नाम लिख दिया जाए, तब कविता के वाक्यों में बदलाव की जाएगा। कविता में ‘मैं’ के स्थान पर ‘वह’ या कोई नाम लिखकर वाक्यों के बदलाव को देखिए और कक्षा में पढ़कर सुनाइए।
'कण-कण में है व्याप्त वही स्वर ______ कालकूट फणि की चिंतामणि'
(क) 'वही स्वर','वह ध्वनि' एवं 'वही तान' आदि वाक्यांश किसके लिए/ किस भाव के लिए प्रयुक्त हुए हैं?
(ख) वही स्वर, वह ध्वनि एवं वही तान से संबंधित भाव का 'रूद्ध-गीत की क्रुद्ध तान है/ निकली मेरी अंतरतर से' - पंक्तियों से क्या कोई संबंध बनता है?
बहुविकल्पी प्रश्न
तिनका कहाँ से उड़कर आया था?
इस कविता से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?
मीरा बाई ने सुबह का चित्र खींचा है। अपनी कल्पना और अनुमान से लिखिए कि नीचे दिए गए स्थानों की सुबह कैसी होती है
(क) गाँव, गली या मुहल्ले में,
(ख) रेलवे प्लेटफ़ॉर्म पर
(ग) नदी या समुद्र के किनारे
(घ) पहाड़ों पर।
नमूने के अनुसार लिखो:
| नमूना → |
छोड़ घोंसला बाहर आया. देखी डालें, देखे पात।
|
| चुरुंगन घोंसला छोड़कर बाहर आया। उसने डालें और पत्ते देखे। |
डाली से डाली पर पहुँचा,
देखी कलियाँ देखे फूल।
