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प्रश्न
इंदौर में लेखिका के पिता खुशहाली के दिन जी रहे थे। लेखिका के पिता के खुशहाली भरे दिनों को स्पष्ट कीजिए।
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उत्तर
इंदौर में लेखिका के पिता की प्रतिष्ठा थी, नाम था और सम्मान था। वे कांग्रेस के साथ-साथ सुधार कार्यों से जुड़े थे। शिक्षा के नाम पर वे केवल उपदेश ही नहीं दिया करते थे बल्कि आठ-दस विद्यार्थियों को अपने घर पर रखकर पढ़ाया करते थे, जिनमें से कई आज अच्छे पदों पर हैं। वहाँ उनकी उदारता के चर्चे भी खूब प्रसिद्ध थे।
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अथवा
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