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गीत-अगीत कविता का शिल्प सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।

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प्रश्न

गीत-अगीत कविता का शिल्प सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।

टीपा लिहा
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उत्तर

कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ विरचित कविता ‘गीत-अगीत’ में प्राकृतिक और मानवीय राग का सुंदर चित्रण है। कविता में तत्सम शब्दोंयुक्त खड़ी बोली का प्रयोग है जिसमें सरसता और लयात्मकता है। कविता में आए अनुप्रास, पुनरुक्ति प्रकाश और मानवीकरण अलंकार इसके सौंदर्य में वृद्धि करते हैं। भाषा इतनी चित्रात्मक है कि सारा दृश्य हमारी आँखों के सामने साकार हो उठता है। जगह-जगह वियोग एवं संयोग श्रृंगार रस घनीभूत हो उठा है।

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पद्य (Poetry) (Class 9 B)
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?

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निम्नलिखित उदाहरण में 'वाक्य-विचलन'को समझने का प्रयास कीजिए। इसी आधार पर प्रचलित वाक्य-विन्यास लिखिए :
उदाहरण: तट पर एक गुलाब सोचता
एक गुलाब तट पर सोचता है।

बैठा शुक उस घनी डाल पर


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गूँज रहा शुक का स्वर वन में


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फ़न (कौशल)

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फन (साँप का मुहँ)

ज़रा (थोड़ा)

फ़लक (आकाश)

जरा (बुढ़ापा)

फलक (लकड़ी का तख्ता)

ज़ फ़ से युक्त दो-दो शब्दों को और लिखिए।


निम्नलिखित मुहावरों का प्रयोग वाक्यों में कीजिए −

(क) टुकड़े चबाना
(ख) पगड़ी उतारना
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निम्नलिखित भाव को पाठ में किन पंक्ति द्वारा अभिव्यक्त किया गया है −
पानी के बिना सब सूना है अत: पानी अवश्य रखना चाहिए।


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए :
पहले पद में भगवान और भक्त की जिन-जिन चीज़ों से तुलना की गई है, उनका उल्लेख कीजिए।


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए :
पहले पद की प्रत्येक पंक्ति के अंत में तुकांत शब्दों के प्रयोग से नाद-सौंदर्य आ गया है, जैसे- पानी, समानी आदि। इस पद में से अन्य तुकांत शब्द छाँटकर लिखिए।


नीचे लिखी पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए :
नीचहु ऊच करै मेरा गोबिंदु काहू ते न डरै


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कवि रैदास ने ‘हरिजीउ’ किसे कहा है? काव्यांश के आधार पर ‘हरिजीउ’ की विशेषताएँ लिखिए।


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