मराठी

'गंगापुत्र के लिए गंगा मैया ही जीविका और जीवन है'- इस कथन के आधार पर गंगा पुत्रों के जीवन-परिवेश की चर्चा कीजिए।

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

'गंगापुत्र के लिए गंगा मैया ही जीविका और जीवन है'- इस कथन के आधार पर गंगा पुत्रों के जीवन-परिवेश की चर्चा कीजिए।
थोडक्यात उत्तर
Advertisements

उत्तर

गंगापुत्र वे कहलाते हैं, जो गंगा मैया को अर्पण किए गए पैसे को गंगाजी की धाराओं के बीच में लेकर आते हैं। लोग गंगा नदी पर पैसे डालते हैं गंगापुत्र उन पैसों को गंगा जी के बहते जल से बाहर निकालते हैं। यह कार्य बहुत जोखिम भरा होता है। गंगा का जल प्रवाह कब इंसान को निगल जाए कहा नहीं जा सकता है। इस काम में जितना जोखिम होता है, उतनी कमायी नहीं होती है। लेकिन उनके पास कोई चारा नहीं है। उन्हें विवश होकर यह कार्य करना पड़ता है। इस आधार पर हम कह सकते हैं कि उनका जीवन-परिवेश बहुत अधिक अच्छा नहीं होगा। दो वक्त की रोटी मिल जाए, यही उनके लिए काफी होगा।
shaalaa.com
दूसरा देवदास
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 2.07: ममता कालिया (दूसरा देवदास) - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ १५८]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Antara Bhag 2 [English] Class 12
पाठ 2.07 ममता कालिया (दूसरा देवदास)
प्रश्न-अभ्यास | Q 2. | पृष्ठ १५८

संबंधित प्रश्‍न

पाठ के आधार पर हर की पौड़ी पर होने वाली गंगाजी की आरती का भावपूर्ण वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।


पुजारी ने लड़की के 'हम' को युगल अर्थ में लेकर क्या आशीर्वाद दिया और पुजारी द्वारा आशीर्वाद देने के बाद लड़के और लड़की के व्यवहार में अटपटापन क्यों आया?

उस छोटी-सी मुलाकात ने संभव के मन में क्या हलचल उत्पन्न कर दी? इसका सूक्ष्म विवेचन कीजिए।

मंसा देवी जाने के लिए केबिल कार में बैठे हुए संभव के मन में जो कल्पनाएँ उठ रही थीं, उनका वर्णन कीजिए।

''पारो बुआ, पारो बुआ इनका नाम है ______ उसे भी मनोकामना का पीला-लाल धागा और उसमें पड़ी गिठान का मधुर स्मरण हो आया।'' कथन के आधार पर कहानी के संकेत पूर्ण आशय पर टिप्पणी लिखिए।


'मनोकामना की गाँठ भी अद्भुत अनूठी है, इधर बाँधो उधर लग जाती है।' कथन के आधार पर पारो की मनोदशा का वर्णन दीजिए।

निम्नलिखित वाक्य का आशय स्पष्ट कीजिएः
'तुझे तो तैरना भी न आवे। कहीं पैर फिसल जाता तो मैं तेरी माँ को कौन मुँह दिखाती।'

निम्नलिखित वाक्य का आशय स्पष्ट कीजिएः
'उसके चेहरे पर इतना विभोर विनीत भाव था मानो उसने अपना सारा अहम् त्याग दिया है, उसके अंदर स्व से जनति कोई-कुंठा शेष नहीं है, वह शुद्ध रूप से चेतन स्वरूप, आत्माराम और निर्मलानंद है।'

निम्नलिखित वाक्य का आशय स्पष्ट कीजिएः

'एकदम अंदर के प्रकोष्ठ में चामुंडा रूप धरिणी मंसादेवी स्थापित थी। व्यापार यहाँ भी था।


'दूसरा देवदास' कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

'हे ईश्वर! उसने कब सोचा था कि मनोकामना का मौन उद्गार इतनी शीघ्र शुभ परिणाम दिखाएगा-आशय स्पष्ट कीजिए।'

इस पाठ का शिल्प आख्याता (नैरेटर-लेखक) की ओर से लिखते हुए बना है- पाठ से कुछ उदाहरण देकर सिद्ध कीजिए।


पाठ में आए पूजा-अर्चना के शब्दों तथा इनसे संबंधित वाक्यों को छाँटकर लिखिए।


पारो और संभव में से आप किसके प्रति अधिक सहानुभूति रखते हैं और क्यों? ‘दूसरा देवदास’ पाठ के आधार पर उस पात्र की मन:स्थिति का वर्णन कीजिए।


"व्यापार यहाँ भी था।" - 'दूसरा देवदास' पाठ के आधार पर इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।


‘भीड़ लड़के ने दिल्‍ली में भी देखी थी, बल्कि रोज़ देखता था। लेकिन इस भीड़ का अंदाज निराला था।’ पंक्ति के माध्यम से भीड़ की तुलनात्मक विवेचना कीजिए।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×