मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता ७ वी

अंतरजाल से पारंपरिक चित्र शैली के प्रकार खोजो और लिखोः जैसे-वारली, मधुबनी आदि। राज्य का नाम, शैली का नाम

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प्रश्न

लघु उत्तर
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उत्तर

क्र. राज्य का नाम शैली का नाम
१. महाराष्ट्र वारली
२. बिहार मधुबनी
३. राजस्थान राजपूत शैला
४. बिहार पटना कलम
५. आंध्र प्रदेश कलमकारी
६. उड़ीसा पटचित्र
७. तमिलनाडु तंजौर चित्रकारी
८. मध्य प्रदेश गोंड कला
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उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 2.03: दाे लघुकथाएँ - खोजबीन [पृष्ठ ३२]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Sulabhbharati Standard 7 Maharashtra State Board
पाठ 2.03 दाे लघुकथाएँ
खोजबीन | Q (१) | पृष्ठ ३२
बालभारती Hindi Sulabhbharati Ekatmik Standard 7 Maharashtra State Board
पाठ 11 दो लघुकथाएँ
अंतःपाठ प्रश्न | Q ४. | पृष्ठ ६१

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“कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं।

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