Advertisements
Advertisements
प्रश्न

Advertisements
उत्तर
| क्र. | राज्य का नाम | शैली का नाम |
| १. | महाराष्ट्र | वारली |
| २. | बिहार | मधुबनी |
| ३. | राजस्थान | राजपूत शैला |
| ४. | बिहार | पटना कलम |
| ५. | आंध्र प्रदेश | कलमकारी |
| ६. | उड़ीसा | पटचित्र |
| ७. | तमिलनाडु | तंजौर चित्रकारी |
| ८. | मध्य प्रदेश | गोंड कला |
संबंधित प्रश्न
‘यातायात की समस्याएँ एवं उपाय’ विषय पर निबंध लिखो।
मैंने समझा मेरे रजा साहब पाठ से
‘भोजन का प्रभाव’- टिप्पणी लिखो।
अपने विद्यालय में आयोजित ‘स्वच्छता अभियान’ का वृत्तांत लिखो। वृत्तांत में स्थल, काल, घटना का उल्लेख आवश्यक है।

यदि प्राकृतिक संसाधन समाप्त हो जाएँ तो...... जैसे - जल, वन आदि।
निम्नलिखित शब्द की सहायता से नए शब्द बनाओ:

त्योहार मनाने के उद्देश्य की वैज्ञानिकता सुनो और सुनाओ।
मीरा का पद पढ़ो और सरल अर्थ बताओ।
बिना सोचे विचारे किसी बात पर विश्वास ना करें।
थर्मामीटर में किस धातु का प्रयोग होता है, बताओ।
विभिन्न पशु-पक्षियों की बोलियों की नकल सुनाओ।
‘बाघ बचाओ परियोजना’ के बारे में जानकारी प्राप्त कर लिखो।
मार्ग पर चलते हुए तुमने कुछ यातायात संकेत देखे होंगे। इन सांकेतिक चिह्न का क्या अर्थ है, लिखो:

शाक (पत्तोंवाली) और सब्जियों के पाँच-पाँच नाम सुनो और सुनाओ।
एक महीने की दिनदर्शिका बनाओ और विशेष दिन बताओ।
अपनी कक्षा द्वारा की गई किसी क्षेत्रभेंट का वर्णन लिखिए।
निम्नलिखित विषय पर 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए -
परीक्षा के दिन
निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:
| “कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं। |
