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NCERT solutions for हिन्दी अंतरा भाग २ कक्षा १२ chapter 2 - पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी - सुमिरिनी के मनके [Latest edition]

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Chapters

कविता खंड

    1: जयशंकर प्रसाद - देवसेना का गीत, कार्नेलिया का गीत

    2: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' - गीत गाने दो मुझे, सरोज स्मृति

    3: सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' - यह दिप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद

    4: केदारनाथ सिंह - बनारस, दिशा

    5: रघुवीर सहाय - वसंत आया, तोड़ो

    6: तुलसीदास - भरत-राम का प्रेम, पद

    7: मलिक मुहम्मद जायसी - बरहमासा

    8: विद्यापति - पद

    9: घनानंद - कवित्त/सवैया

गद्य खंड

    1: रामचंद्र शुक्ल - प्रेमघन की छाया-स्मृति

▶ 2: पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी - सुमिरिनी के मनके

    3: फणीश्वरनाथ 'रेणु' - संवदिया

    4: भीष्म साहनी - गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात

    5: असगर वजाहत - शेर, पहचान, चार हाथ. साझा

    6: निर्मल वर्मा - जँहा कोई वापसी नहीं

    7: ममता कालिया - दूसरा देवदास

    8: हजारी प्रसाद द्विवेदी - कुटज

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Solutions for Chapter 2: पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी - सुमिरिनी के मनके

Below listed, you can find solutions for Chapter 2 of CBSE NCERT for हिन्दी अंतरा भाग २ कक्षा १२.


प्रश्न-अभ्यासयोग्यता विस्तार
प्रश्न-अभ्यास [Pages 72 - 74]

NCERT solutions for हिन्दी अंतरा भाग २ कक्षा १२ 2 पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी - सुमिरिनी के मनके प्रश्न-अभ्यास [Pages 72 - 74]

बालक बच गया

(क) 1.Page 72

बालक से उसकी उम्र और योग्यता से ऊपर के कौन-कौन से प्रश्न पूछे गए?

(क) 2.Page 72

बालक ने क्यों कहा कि मैं यावज्जन्म लोकसेवा करूँगा?

(क) 3.Page 72

बालक द्वारा इनाम में लड्डू माँगने पर लेखक ने सुख की साँस क्यों भरी?

(क) 4.Page 73

बालक की प्रवृत्तियों का गला घोंटना अनुचित है, पाठ में ऐसा आभास किन स्थलों पर होता है कि उसकी प्रवृत्तियों का गला घोटा जाता है?

(क) 5.Page 73

"बालक बच गया। उसके बचने की आशा है क्योंकि वह लड्डू की पुकार जीवित वृक्ष के हरे पत्तों का मधुर मर्मर था, मरे काठ की अलमारी की सिर दुखानेवाली खड़खड़ाहट नहीं" कथन के आधार पर बालक की स्वाभाविक प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।

(क) 6.Page 73

उम्र के अनुसार बालक में योग्यता का होना अवसक है किन्तु उसका यानि या प्रदासनिक होना जरुरी नहीं लर्निग आउटकम के बारे में विचार कीजिये

घड़ी के पुर्जे

(ख) 1.Page 73

लेखक ने धर्म का रहस्य जानने के लिए 'घड़ी के पुर्ज़े' का दृष्टांत क्यों दिया है?

(ख) 2.Page 73

'धर्म का रहस्य जानना वेदशास्त्रज्ञ धर्माचार्यों का ही काम है।' आप इस कथन से कहाँ तक सहमत हैं? धर्म संबंधी अपने विचार व्यक्त कीजिए।

(ख) 3.Page 73

घड़ी समय का ज्ञान कराती है। क्या धर्म संबंधी मान्यताएँ या विचार अपने समय का बोध नहीं कराते?

(ख) 4.Page 73

धर्म अगर कुछ विशेष लोगों वेदशास्त्र, धर्माचार्यों, मठाधीशों, पंडे-पुजारियों की मुट्ठी में है तो आम आदमी और समाज का उससे क्या संबंध होगा? अपनी राय लिखिए।

(ख) 5.Page 73

'जहाँ धर्म पर कुछ मुट्ठीभर लोगों का एकाधिकार धर्म को संकुचित अर्थ प्रदान करता है वहीं धर्म का आम आदमी से संबंध उसके विकास एवं विस्तार का द्योतक है।' तर्क सहित व्याख्या कीजिए।

(ख) 6. (क)Page 73

निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-

'वेदशास्त्रज्ञ धर्माचार्यों का ही काम है कि घड़ी के पुर्ज़े जानें, तुम्हें इससे क्या?'

(ख) 6. (ख)Page 73

निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
'अनाड़ी के हाथ में चाहे घड़ी मत दो पर जो घड़ीसाज़ी का इम्तहान पास कर आया है, उसे तो देखने दो।'

(ख) 6. (ग)Page 73

निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
'हमें तो धोखा होता है कि परदादा की घड़ी जेब में डाले फिरते हो, वह बंद हो गई है, तुम्हें न चाबी देना आता है न पुर्ज़े सुधारना, तो भी दूसरों को हाथ नहीं लगाने देते।'

ढेले चुन लो

(ग) 1.Page 73

वैदिककाल में हिंदुओं में कैसी लौटरी चलती थी जिसका ज़िक्र लेखक ने किया है।

(ग) 2.Page 73

'दुर्लभ बंधु' की पेटियों की कथा लिखिए।

(ग) 3.Page 73

जीवन साथी का चुनाव मिट्टी के ढेलों पर छोड़ने के कौन-कौन से फल प्राप्त होते हैं।

(ग) 4.Page 73

मिट्टी के ढेलों के संदर्भ में कबीर की साखी की व्याख्या कीजिए-

पत्थर पूजे हरि मिलें तो तू पूज पहार।
इससे तो चक्की भली, पीस खाय संसार।।

(ग) 5.Page 74

जन्म भर के साथी का चुनाव मिटटी के ढेले पर छोड़ना बुद्धिमानी नहीं है इसीलिए बेटी को शिक्छित होना अनिवार्य है बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ के सन्दर्भ में विचार कीजिये

(ग) 6. (क)Page 74

निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
'अपनी आँखों से जगह देखकर, अपने हाथ से चुने हुए मिट्टी के डगलों पर भरोसा करना क्यों बुरा है और लाखों करोड़ों कोस दूर बैठे बड़े-बड़े मट्टी और आग के ढेलों-मंगल, शनिश्चर और बृहस्पति की कल्पित चाल के कल्पित हिसाब का भरोसा करना क्यों अच्छा है।'

(ग) 6. (ख)Page 74

निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-

'आज का कबूतर अच्छा है कल के मोर से, आज का पैसा अच्छा है कल की मोहर से। आँखों देखा ढेला अच्छा ही होना चाहिए लाखों कोस के तेज पिंड से।'

योग्यता विस्तार [Page 74]

NCERT solutions for हिन्दी अंतरा भाग २ कक्षा १२ 2 पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी - सुमिरिनी के मनके योग्यता विस्तार [Page 74]

(क) 1.Page 74

बालक बच गया

बालक की स्वाभाविक प्रवृत्तियों के विकास में 'रटना' बाधक है- कक्षा में संवाद कीजिए।

(क) 2.Page 74

बालक बच गया

ज्ञान के क्षेत्र में 'रटने' का निषेध है किंतु क्या आप रटने में विश्वास करते हैं। अपने विचार प्रकट कीजिए।

(ख) 1.Page 74

घडी के पुर्जे

धर्म संबंधी अपनी मान्यता पर लेख/निबंध लिखिए।

(ख) 2.Page 74

‘धर्म का रहस्य जानना सिर्फ़ धर्माचार्यों का काम नहीं, कोई भी व्यक्ति अपने स्तर पर उस रहस्य को जानने की कोशिश कर सकता है, अपनी राय दे सकता है’- टिप्पणी कीजिए।

(ग) 1.Page 74

ढेले चुन लो

समाज में धर्म संबंधी अंधविश्वास पूरी तरह व्याप्त है। वैज्ञानिक प्रगति के संदर्भ में धर्म, विश्वास और आस्था पर निबंध लिखिए।

(ग) 2.Page 74

अपने घर में या आस-पास दिखाई देने वाले किसी रिवाज या अंधविश्वास पर एक लेख लिखिए।

Solutions for 2: पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी - सुमिरिनी के मनके

प्रश्न-अभ्यासयोग्यता विस्तार
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NCERT solutions for हिन्दी अंतरा भाग २ कक्षा १२ chapter 2 - पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी - सुमिरिनी के मनके

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