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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-'अनाड़ी के हाथ में चाहे घड़ी मत दो पर जो घड़ीसाज़ी का इम्तहान पास कर आया है, उसे तो देखने दो।'

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प्रश्न

निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
'अनाड़ी के हाथ में चाहे घड़ी मत दो पर जो घड़ीसाज़ी का इम्तहान पास कर आया है, उसे तो देखने दो।'

संक्षेप में उत्तर
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उत्तर

तुम अपनी घड़ी को किसी अनाड़ी व्यक्ति को देने से डरते हो। तुम्हारे इस इनकार को समझा जा सकता है। जो व्यक्ति इस विषय पर सब सीख कर आया है, जो इसका जानकार है, उसे भी तुम अपनी घड़ी में हाथ लगाने नहीं देते हो। यह बात समझ में नहीं आती है। अर्थात लेखक कहता है कि जो व्यक्ति मूर्ख है, उसे तुम धर्म के बारे में समझाने या बताने से मना करते हो। अन्य और कोई व्यक्ति इस विषय में जानता है, जिसने इस विषय में जानकारी हासिल की है, तुम उसे कुछ क्यों नहीं बताने देते हो। 

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सुमिरिनी के मनके
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अध्याय 2.02: पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी (सुमिरिनी के मनके) - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ ८५]

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एनसीईआरटी Hindi Antara Bhag 2 Class 12
अध्याय 2.02 पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी (सुमिरिनी के मनके)
प्रश्न-अभ्यास | Q (ख) 6. (ख) | पृष्ठ ८५

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