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SSC (Hindi Medium) १० वीं कक्षा - Maharashtra State Board Question Bank Solutions

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कारण लिखिए :

दिलीप साइकिल पर बिना बैठे चलने लगा ______

[2.11] दुख (पूरक पठन)
Chapter: [2.11] दुख (पूरक पठन)
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कारण लिखिए :

दिलीप खोमचेवाले के साथ उसके घर गया ______

[2.11] दुख (पूरक पठन)
Chapter: [2.11] दुख (पूरक पठन)
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गली के मुख पर कमेटी की बिजली का ______ जल रहा था।

[2.11] दुख (पूरक पठन)
Chapter: [2.11] दुख (पूरक पठन)
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रुपया हाथ में ले माँ ने ______ से पूछा। 

[2.11] दुख (पूरक पठन)
Chapter: [2.11] दुख (पूरक पठन)
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रहने दो कोई ______ नहीं फिर आ जाएगा। 

[2.11] दुख (पूरक पठन)
Chapter: [2.11] दुख (पूरक पठन)
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उसने ______ खोमचेवाले से सौदा खरीद कर खाया था।

[2.11] दुख (पूरक पठन)
Chapter: [2.11] दुख (पूरक पठन)
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बढ़ता हुआ प्रदूषण और उसकी रोकथाम के लिए किए जाने वाले उपाय लिखिए ।

[4] उपयोगित लेखन (रचना विभाग)
Chapter: [4] उपयोगित लेखन (रचना विभाग)
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‘गरीबी उन्नति में बाधा नहीं बनती’, विषय पर अपने विचार लिखिए।

[2.11] दुख (पूरक पठन)
Chapter: [2.11] दुख (पूरक पठन)
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परिच्छेद पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

      परोपकार ही मानवता है, जैसा कि राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने लिखा है - ‘वही मनुष्य है जो मनुष्य के लिए मरे।’ केवल अपने दुख-सुख की चिंता करना मानवता नहीं, पशुता है। परोपकार ही मानव को पशुता से सदय बनाता है। वस्तुतः निस्स्वार्थ भावना से दूसरों का हित साधन ही परोपकार है। मनुष्य अपनी सामर्थ्य के अनुसार परोपकार कर सकता है। दूसरों के प्रति सहानुभूति करना ही परोपकार है और सहानुभूति किसी भी रूप में प्रकट की जा सकती है। किसी निर्धन की आर्थिक सहायता करना अथवा किसी असहाय की रक्षा करना परोपकार के रूप हैं। किसी पागल अथवा रोगी की सेवा-शुश्रूषा करना अथवा किसी भूखे को अन्नदान करना भी परोपकार है। किसी को संकट से बचा लेना, किसी को कुमार्ग से हटा देना, किसी दुखी-निराश को सांत्वना देना-ये सब परोपकार के ही रूप हैं। कोई भी कार्य, जिससे किसी को लाभ पहॅुंचता है, परोपकार है, जो अपनी सामर्थ्य के अनुसार विभिन्न रूपों में किया जा सकता है।

(१) संजाल पूर्ण कीजिए :

 

(२) ‘वही मनुष्य है जो मनुष्य के लिए मरे’ इस पंक्ति का तात्पर्य लिखिए। 

(३)

१. वचन परिवर्तन कीजिए :
१. चिंता - ______
२. भूखे - ______

२. निम्न शब्दों के लिंग पहचानिएः
१. सामर्थ्य - ______
२. परोपकार - ______

(४) ‘परहित सरिस धरम नहिं भाई’ पर अपने विचार लिखिए ।

[5] अपठित विभाग
Chapter: [5] अपठित विभाग
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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

आने वाली महिला की तबीयत थोड़ी खराब थी और पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उनका इलाज होना था। चूँकि वह मेरी बुआ जी को जानते थे और बुआ जी के छोटे भाई का परिवार पटना में था इसलिए ये तो सोचने की बात नहीं थी कि वह कहाँ रहेंगे। वह बिना किसी पूर्व सूचना के हमारे 'घर पहुँच गए थे। उनकी ट्रेन तो शाम को थी, लेकिन ट्रेन के टाइम से न चलने का बुरा कौन मानता है। ट्रेन पाँच घंटे लेट पहुँची थी और हमारे वह मेहमान बिना खाए-पिए आधी रात में हमारे घरपहुँच गए थे।

फटाफट खाना बना। सोने का जुगाड़ हुआ।
और सुबह उन्हें अस्पताल पहुँचाने का भी।

वे कोई सप्ताह भर हमारे घर रहे। हम खूब घूल-मिल गए। हम रोज ठहाके लगाते, साथ खातेऔर पूरी मस्ती करते। ऐसा लग रहा था, मानो हम सदियों से एक-दूसरे को जानते हों। बुआ जी ने'तिल की मिठाई भेजी थी। दिल्‍ली में उसे गजक कहते हैं, हमारे यहाँ सब तिलकुंट कहते थे। हम सबने तिल और गुड़ की उस मिठाई को खूब मजे लेकर खाया। हमारी बुआ जी सारे संसार का ख्याल रखतीथीं और भाई-भतीजों में तो उनकी आत्मा ही बसती थी।

उन्होंने अपने परिचित भेज दिए, हमने उन्हें रिश्तेदार बना लिया।
आप जानकर हैरान रह जाएँगे कि हम दुबारा कभी उन रिश्तेदारों से नहीं मिल पाए जो उस रातहमारे घर आए थे। लेकिन हम सभी भाई-बहनों के जेहन में उस रिश्ते की याद आज भी ताजा है। हम आज भी उनके आने और अपनी रजाई छिन जाने को याद कर खुश होते हैं।

  1. कृति पूर्ण कीजिए:   [2]
  2. उत्तर लिखिए:     [2]
    1. बुआ जी की आत्मा बसंती थी - __________
    2. आने वाली महिला की तबीयत थी - __________
    3. बुआ जी खयाल रखती थीं - ____________
    4. अतिथि लेखक के घर रहे - __________
  3. 'संयुक्त परिवार' इस विषय पर 30 से 40 शब्दों में अपने विचार लिखिए।     [3]
[5] अपठित विभाग
Chapter: [5] अपठित विभाग
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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

आकाश में बिजली की कौंधें बीच-बीच में लपक उठती थीं। बादलों की गड़गड़ाहट सुनकर रामबोला को लगा कि मानों चैनसिंह ठाकुर अपने हलवाहा को डॉट रहे हैं। रामबोला अनायास ही ताव में आ गया। उठा और फिर नये श्रम की साधना में लग गया। दूसरे छप्पर के ढीले पड़ गए अंजर-पंजर को कसने के 'लिए पास ही खलार में उगी लंबी घास-पतवार उखाड़ लाया। रामबोला ने भिखारी बस्ती के और लोगों को जैसे घास बैँटकर रस्सी बनाते देखा था; वैसे ही बैंटने लगा। जैसे-तैसे रस्सियाँ बैंटी, जस-तस टट्टर बाँधा। अब जो उसकी आधी से अधिक उधड़ी हुई छावन पर ध्यान गया तो नन्हे मन के उत्साह को फिर' काठ मार गया। घास-फूस, ज्यौनारों में जूठन के साथ-साथ बाहर फेंकी गई पत्तलों और चिथड़े-गुदड़ों से 'बनाई गई वह छोटी -सी छपरिया फिर से छानें के लिए वह सामान कहाँ से जुटाए? हवा दूवारा उड़ाए हुए.माल वह इस बरसात में कहाँ-कहाँ ढूँढ़ैगा। दैव आज प्रलय की बरखा करके ही दम लेंगे। हवा के मारे औरों के छप्पर भी पेंगें ले रहे हैं।

(1) लिखिए:  (2)

गद्यांश में उल्लिखित प्राकृतिक घटक

____________
____________
____________
____________

(2) लिखिए:

(i) एक शब्द में उत्तर लिखिए :   (1)

  1. हलवाहा को डाँटने वाला - ____________
  2. अनायास ही ताव में आने वाला - ____________

(ii) विशेषता लिखिए :  (1)

  1. बिजली - ______
  2. बादल - ______

(3) 'विनाश और निर्माण प्रकृति के नियम हैं' इस विषय पर 30 से 40 शब्दों में अपने विचार लिखिए।  (3)

[5] अपठित विभाग
Chapter: [5] अपठित विभाग
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निम्नलिखित अपठित गदूयांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

अब अकेला बैल किस काम का? उसका जोड़ बहुत ढूँढ़ा गया, पर न मिला। निदान यह सलाह ठहरी कि इसे बेच डालना चाहिये। गाँव में एक समझू साहु थे, वह इकका गाड़ी हाँकते थे। गाँव के गुड़, घी लाद कर मंडी ले जाते, मंडी से तेल, नमक भर लाते और गाँव में बेचते। इस बैल पर उनका मन लहराया। उन्होंने सोचा, यह बैल हाथ लगे तो दिनभर में बेखटके तीन खेप हों। आजकल तो एक ही खेप में लाले पड़े रहते हैं। बैल देखा, गाड़ी में दौड़ाया, बाल-भौंरी की पहचान करायी, मोल-तोल किया और उसे लाकर दूवार पर बाँध ही दिया। एक महीने में दाम चुकाने का वादा ठहरा। चौधरी को भी गरज थी ही, घाटे की परवाह न की।

समझू साहु ने नया बेल पाया, तो लगे उसे रगेदने। वह दिन में तीन-तीन, चार-चार खेपें करने लगे। न चारे की फिक्र थी, न पानी की, बस खेपों से काम था।

(1) कृति पूर्ण कीजिए -  (2)

(2) लिखिए -  (2)

बैल को देखकर समझू ने यह किया :

  1. ____________
  2. ____________
  3. ____________
  4. ____________

(3) 'हमारे अन्नदाता किसान' इस विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए।  (2)

[5] अपठित विभाग
Chapter: [5] अपठित विभाग
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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

रामनाम जपिब श्रवननि सुनिबौ।
सलिल मोह में बहि नहीं जाईबौ।। टेक ।।
अकथ कथ्यौ न जाइ।
कागद लिख्यौ न माइ।।
सकल भुवनपति मिल्यौ है सहज भाइ ।। १।।
राम माता, राम पिता, राम सबै जीव दाता।
भणत नामईयौ छीपै।
कहै रे पुकारि गीता ।।२।।

(1) आकृति पूर्ण कीजिए :  (2)

(i) 

(ii)

(2) निम्नलिखित शब्दों के लिए समानार्थी शब्द पट्यांश में से ढूँढ़कर लिखिए:  (2)

  1. कानों से = ______
  2. लालच = ______
  3. न कहने योग्य = ______
  4. कागज = ______

(3) प्रथम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।  (2)

[2.07] अकथ कथ्‍यौ न जाइ (पद्य)
Chapter: [2.07] अकथ कथ्‍यौ न जाइ (पद्य)
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निम्नलिखित मुदूदों के आधार पर पद्यविश्लेघषण कीजिए :

'मेरी स्मृति' अथवा 'चिंता' मुद्दे:

  1. रचनाकार का नाम
  2. रचना की विधा
  3. पसंद की पंक्तियाँ
  4. पंक्तियाँ पसंद होने के कारण
  5. रचना से प्राप्त संदेश/प्रेरणा।
[1.04] मेरी स्‍मृति (पद्य)
Chapter: [1.04] मेरी स्‍मृति (पद्य)
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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

दिल के सूरज को, सलीबों पे चढ़ाने वालो।
रात ढल जाएगी, इक रोज जमाने वालो।

में तो खुशबू हूँ, किसी फूल में बस जाऊँगा,
तुम कहाँ जाओगे, कॉँटों के बिछाने वालो।

मैं उसूलों के उजालों में रहा करता हैँ,
सोच लों मेरी तरफ लौट के आने वालो।

उँगलियाँ तुमपे उठाएगी ये दुनिया इक दिन,
अपने 'बेदिल' से नजर फेर के जाने वालो।

(1) जोड़ियाँ मिलाकर फिर से लिखिए :  (2)

'अ' 'आ'
(i) दिल का सूरज (अ) बेदिल से
(ii) खुशबू बसेगी (ब) उसूलों के
(iii) उजालों में रहना (क) फूल में
(iv) नजर फेर लेना (ड) सलीबों पे चढ़ेगा

(2) 'बुरा जो देखन मैं चला, मुझसे बुरा न कोय' इस विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।  (2)

[1.12] गजलें (पूरक पठन)
Chapter: [1.12] गजलें (पूरक पठन)
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उत्तर लिखिए :

द्वितीय तथा चतुर्थ चरण
की मात्राएँ _____ हैं।
नित नूतन मंगल पुरमाही।
निमिष सरिसदिन-जामिनि जाहीं।।
बड़े भोर भूपति मणिजागे।
जाचक गुनगन गावन लागे।।
यह ____ छंद है।
[3] व्याकरण विभाग (भाषाभ्यास)
Chapter: [3] व्याकरण विभाग (भाषाभ्यास)
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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

           शामनाथ की पार्टी सफलता के शिखर चूमने लगी। कहीं कोई रुकावट न थी, कोई अड़चन न थी। मेम साहब को परदे पसंद आए थे, सोफा कवर का डिजाइन पसंद आया था, कमरे की सजावट पसंद आई थी। इससे बढ़कर क्‍या चाहिए? साहब तो चुटकुले और कहानियाँ कहने लग गए थे। दफ्तर में जितना रोब रखते थे, यहाँ पर उतने ही दोस्‍तपरवर हो रहे थे और उनकी स्‍त्री, काला गाउन पहने, गले में सफेद मोतियों का हार, सेंट और पावडर की महक से ओत-प्रोत, कमरे में बैठी सभी देशी स्‍त्रियों की आराधना का केंद्र बनी हुई थीं। बात-बात पर हँसतीं, बात-बात पर सिर हिलातीं और शामनाथ की स्‍त्री से तो ऐसे बातें कर रहीं थीं, जैसे उनकी पुरानी सहेली हो।

           इसी रौ में साढ़े दस बज गए। वक्‍त कब गुजर गया पता ही न चला।

           आखिर सब लोग खाना खाने के लिए उठे और बैठक से बाहर निकले। आगे-आगे शामनाथ रास्‍ता दिखाते हुए, पीछे चीफ और दूसरे मेहमान।

           बरामदे में पहुँचते ही शामनाथ सहसा ठिठक गए। जो दृश्य उन्होंने देखा, उससे उनकी टाँगें लड़खड़ा गईं, बरामदे में ऐन कोठरी के बाहर माँ अपनी कुर्सी पर ज्‍यों-की-त्‍यों बैठी थीं।

(1) उत्तर लिखिए: (2)

(2) लिखिए: (2)

(3) ‘समय किसी के लिए रुकता नहीं’ इस विषय पर 30 से 40 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (3)

[2.02] चीफ की दावत
Chapter: [2.02] चीफ की दावत
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निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

            अंजुना बीच नीले पानीवाला, पथरीला बहुत ही खूबसूरत हैं। इसके एक ओर लंबी-सी पहाड़ी है, जहाँ से बीच का मनोरम दृश्य देखा जा सकता है। समुद्र तक जाने के लिए थोड़ा नीचे उतरना पड़ता है। नीला पानी काले पत्थरों पर पछाड़ खाता रहता है। पानी ने काट-काटकर इन पत्थरों में कई छेद कर दिए हैं जिससे ये पत्थर कमजोर भी हो गए हैं। साथ ही समुद्र के काफी पीछे हट जाने से कई पत्थरों के बीच में पानी भर गया है। इससे वहाँ काई ने अपना घर बना लिया है। फिसलने का डर हमेशा लगा रहता है, लेकिन संघर्षों में ही जीवन है, इसलिए यहाँ घूमने का भी अपना अलग आनंद है। यहाँ युवाओं का दल तो अपनी मस्ती में डूबा रहता है, लेकिन परिवार के साथ आए पर्यटकों का ध्यान अपने बच्चों को खतरों से सावधान रहने के दिशानिर्देश देने में ही लगा रहता है। मैंने देखा कि समुद्र किनारा होते हुए भी बेनालियम बीच तथा अंजुना बीच का अपना-अपना सौंदर्य है। बेनालियम बीच रेतीला तथा उथला है। यह मछुआरों की पहली पसंद है।

(1) विशेषताएँ लिखिए: (2)

अंजुना बीच बेनालियम बीच
(i) ______ (i) ______
(ii) ______ (ii) ______

(2) निम्नलिखित विधान सही अथवा गलत पहचानकर लिखिए: (2)

  1. पानी ने काट-काटकर इन पत्थरों में कई छेद नहीं कर दिए हैं।
  2. समुद्र तक जाने के लिए थोड़ा नीचे उतरना पड़ता है।
  3. बेनालियम बीच नीले पानीवाला है।
  4. अंजुना बीच पर फिसलने का डर हमेशा लगा रहता है।

(3) ‘संघर्षों में ही जीवन है’- इस विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)

[5] अपठित विभाग
Chapter: [5] अपठित विभाग
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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

महुआ खड़ा
बिछा श्वेत चादर
किसे जोहता।

किसकी व्यथा
छा गई बन घटा
नभ है घिरा।

साँझ का तारा
किसे खोजने आया
आम निशा में।

कौन संदेशा
ले पवन आया है
सुनने तो दो।

(1) उचित मिलान कीजिए: (2)

‘अ’ ‘आ’
(i) महुआ आम
(ii) साँझ पवन
(iii) संदेशा श्वेत चादर
(iii) व्यथा तारा
  घटा

(2) (i) निम्नलिखित शब्दों के लिंग पहचानकर लिखिए: (1)

  1. नभ - ______
  2. निशा - ______

(ii) निम्नलिखित शब्दों के वचन परिवर्तन कीजिए: (1)

  1. तारा - ______
  2. घटा - ______

(3) उपर्युक्त पद्यांश से किसी एक हाइकु का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)

[1.04] मेरी स्‍मृति (पद्य)
Chapter: [1.04] मेरी स्‍मृति (पद्य)
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निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर पद्य विश्लेषण कीजिए:

‘अकथ कथ्‍यौ न जाइ’

१. रचनाकार का नाम -

२. रचना की विधा - 

३. पसंद की पंक्तियाँ - 

४. पंक्तियाँ पसंद होने का कारण -

५. रचना से प्राप्त संदेश/प्रेरणा -

[2.07] अकथ कथ्‍यौ न जाइ (पद्य)
Chapter: [2.07] अकथ कथ्‍यौ न जाइ (पद्य)
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