''साहित्य थके हुए मनुष्य के लिए विश्रांति ही नहीं है। वह उसे आगे बढ़ने के लिए उत्साहित भी करता है।'' स्पष्ट कीजिए।
[2.08] रामविलास शर्मा : यथास्मै रोचते विश्वम्
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''मानव संबंधों से परे साहित्य नहीं है।'' इस कथन की समीक्षा कीजिए।
[2.08] रामविलास शर्मा : यथास्मै रोचते विश्वम्
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'पंद्रहवीं-सोलहवीं' सदी में हिंदी-साहित्य ने कौन-सी सामाजिक भूमिका निभाई?
[2.08] रामविलास शर्मा : यथास्मै रोचते विश्वम्
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साहित्य के 'पांचजन्य' से लेखक का क्या तात्पर्य है? 'साहित्य का पांचजन्य' मनुष्य को क्या प्रेरणा देता है?
[2.08] रामविलास शर्मा : यथास्मै रोचते विश्वम्
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साहित्यकार के लिए स्रष्टा और द्रष्टा होना अत्यंत अनिवार्य है, क्यों और कैसे?
[2.08] रामविलास शर्मा : यथास्मै रोचते विश्वम्
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कवि-पुरोहित के रूप में साहित्यकार की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
[2.08] रामविलास शर्मा : यथास्मै रोचते विश्वम्
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सप्रसंग सहित व्याख्या कीजिएः
'कवि की यह सृष्टि निराधार नहीं होती। हम उसमें अपनी ज्यों-की-त्यों आकृति भले ही न देखें, पर ऐसी आकृति ज़रूर देखते हैं जैसी हमें प्रिय है, जैसी आकृति हम बनाना चाहते हैं।'
[2.08] रामविलास शर्मा : यथास्मै रोचते विश्वम्
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सप्रसंग सहित व्याख्या कीजिएः
'प्रजापति-कवि गंभीर यथार्थवादी होता है, ऐसा यथार्थवादी जिसके पाँव वर्तमान की धरती पर हैं और आँखें भविष्य के क्षितिज पर लगी हुई हैं।'
[2.08] रामविलास शर्मा : यथास्मै रोचते विश्वम्
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सप्रसंग सहित व्याख्या कीजिएः
'इसके सामने निरुद्देश्य कला, विकृति काम-वासनाएँ, अहंकार और व्यक्तिवाद, निराशा और पराजय के 'सिद्धांत' वैसे ही नहीं ठहरते जैसे सूर्य के सामने अंधकार।'
[2.08] रामविलास शर्मा : यथास्मै रोचते विश्वम्
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पाठ में प्रतिबिंब-प्रतिबिंबित जैसे शब्दों पर ध्यान दीजिए। इस तरह के दस शब्दों की सूची बनाइए।
[2.08] रामविलास शर्मा : यथास्मै रोचते विश्वम्
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पाठ के आधार पर हर की पौड़ी पर होने वाली गंगाजी की आरती का भावपूर्ण वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
[2.09] ममता कालिया : दूसरा देवदास
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'गंगापुत्र के लिए गंगा मैया ही जीविका और जीवन है'- इस कथन के आधार पर गंगा पुत्रों के जीवन-परिवेश की चर्चा कीजिए।
[2.09] ममता कालिया : दूसरा देवदास
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पुजारी ने लड़की के 'हम' को युगल अर्थ में लेकर क्या आशीर्वाद दिया और पुजारी द्वारा आशीर्वाद देने के बाद लड़के और लड़की के व्यवहार में अटपटापन क्यों आया?
[2.09] ममता कालिया : दूसरा देवदास
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उस छोटी-सी मुलाकात ने संभव के मन में क्या हलचल उत्पन्न कर दी? इसका सूक्ष्म विवेचन कीजिए।
[2.09] ममता कालिया : दूसरा देवदास
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मंसा देवी जाने के लिए केबिल कार में बैठे हुए संभव के मन में जो कल्पनाएँ उठ रही थीं, उनका वर्णन कीजिए।
[2.09] ममता कालिया : दूसरा देवदास
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''पारो बुआ, पारो बुआ इनका नाम है ______ उसे भी मनोकामना का पीला-लाल धागा और उसमें पड़ी गिठान का मधुर स्मरण हो आया।'' कथन के आधार पर कहानी के संकेत पूर्ण आशय पर टिप्पणी लिखिए।
[2.09] ममता कालिया : दूसरा देवदास
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'मनोकामना की गाँठ भी अद्भुत अनूठी है, इधर बाँधो उधर लग जाती है।' कथन के आधार पर पारो की मनोदशा का वर्णन दीजिए।
[2.09] ममता कालिया : दूसरा देवदास
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निम्नलिखित वाक्य का आशय स्पष्ट कीजिएः
'तुझे तो तैरना भी न आवे। कहीं पैर फिसल जाता तो मैं तेरी माँ को कौन मुँह दिखाती।'
[2.09] ममता कालिया : दूसरा देवदास
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निम्नलिखित वाक्य का आशय स्पष्ट कीजिएः
'उसके चेहरे पर इतना विभोर विनीत भाव था मानो उसने अपना सारा अहम् त्याग दिया है, उसके अंदर स्व से जनति कोई-कुंठा शेष नहीं है, वह शुद्ध रूप से चेतन स्वरूप, आत्माराम और निर्मलानंद है।'
[2.09] ममता कालिया : दूसरा देवदास
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निम्नलिखित वाक्य का आशय स्पष्ट कीजिएः
'एकदम अंदर के प्रकोष्ठ में चामुंडा रूप धरिणी मंसादेवी स्थापित थी। व्यापार यहाँ भी था।
[2.09] ममता कालिया : दूसरा देवदास
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