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प्रश्न
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उत्तर
संभव गंगा नदी की धारा के मध्य एक व्यक्ति को देखता है, जो माँ गंगा में सूर्य को जल अर्पण कर रहा है। उसके चेहरे के भावों को देखकर संभव उनकी ओर आकर्षित हो जाता है। वह गंगा मैया के मध्य खड़े होकर प्रार्थना कर रहे थे। उनके चेहरे पर प्रसन्नता और विनती का बहुत सुंदर रूप था। उनके चेहरे पर यह भाव था मानो उन्होंने अपने अंदर व्याप्त अहंकार को समाप्त कर दिया है। प्रायः मनुष्य अहंकार के कारण परेशान और दुखी होता है। जब मनुष्य अहंकार के भाव को त्याग देता है, उसके हृदय में फिर किसी बात का दुख, परेशानी तथा कुंठा नहीं बचती है। ऐसा व्यक्ति शुद्ध हो जाता है। उसे आत्म ज्ञान हो जाता है, वह निर्मल तथा आनंद को प्राप्त कर जाता है।
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