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SSC (Marathi Semi-English) १० वीं कक्षा - Maharashtra State Board Important Questions

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निम्नलिखित विषय पर लगभग 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए:

मैं सड़क बोल रही हूँ......

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Chapter: [23] उपयोजित लेखन (रचना विभाग)
Concept: निबंध लेखन

निम्नलिखित विषय पर लगभग 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए:

‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’

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Chapter: [23] उपयोजित लेखन (रचना विभाग)
Concept: निबंध लेखन

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हों।

आज के युग में विद्यार्थी उस प्रकार अपने गुरु का सान्निध्य नहीं पाता, स्नेह तथा वात्सल्य नहीं पाता, जैसा प्राचीन काल में पाता था और निर्देश देने के लिए भी गुरु के पास कुछ नहीं है। आज की स्थिति सुखद नहीं है। हमारे विद्यार्थी कहाँ जाएँगे, क्या करेंगे-हम नहीं जानते। अध्यापकों ने, जो बन सका आपको योग्यता दी । आप अपना कर्म क्षेत्र बना सकते हैं, लेकिन एक बात आज भी हम देंगे। वह जो यज्ञ की ज्वाला हुआ करती थी, उसके प्रतीक रूप में आपके हृदय में हम वह ज्वाला जगा देना चाहते हैं जो जीवन की होती है, जो वास्तव में जीवन को गढ़ती है, नया जीवन देती है। वह ज्ञान की ज्वाला हम अपनी समस्त शुभकामनाओं के साथ, आज भी आपको दे सकते हैं।
हमारा अत्यंत प्राचीन देश है और हमारी संस्कृति भी अत्यंत प्राचीन है। प्राचीन संस्कृति वाले देशों के सामने समस्याएँ कुछ दूसरी हुआ करती हैं। जिनकी संभाव्यता कुछ ही युगों की है, कुछ ही वर्षों की है, नवीन है, उनके पास बहुत कुछ खाने बदलने को नहीं है और खाने बदलने से उनकी कुछ हानि भी नहीं होती।
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Chapter: [23] उपयोजित लेखन (रचना विभाग)
Concept: गद्‍य आकलन

निम्नलिखित विषय पर लगभग 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए।

यदि मोबाइल न होता

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Chapter: [23] उपयोजित लेखन (रचना विभाग)
Concept: निबंध लेखन

निम्नलिखित जानकारी के आधार पर पत्रलेखन कीजिए।

सुनिल/समिक्षा जोशी, विवेकानंद छात्रावास, जालना से अपने छोटे भाई सुमित जोशी, 6/36 जोशी मार्ग, इंदौर, मध्य प्रदेश को “योग का महत्त्व” समझाते हुए पत्र लिखता/लिखती है।

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Chapter: [23] उपयोजित लेखन (रचना विभाग)
Concept: पत्रलेखन

निम्नलिखित जानकारी के आधार पर पत्रलेखन कीजिए।

मोहन/महिमा पालेकर, यशवंतराव चव्हाण नगर, अकोट से व्यवस्थापक, संजीवनी औषधालय, लक्ष्मी रोड, नागपुर को पत्र लिखकर आयुर्वेदिक औषधियों की माँग करता/करती है।

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Chapter: [23] उपयोजित लेखन (रचना विभाग)
Concept: पत्रलेखन

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हो।

बसंत के आगमन के साथ ही कभी-कभी ऐसा लगता है, मानो जंगल में लाल रंग की लपटें उठ रही हों, ये लपटें आग की नहीं बल्कि पलाश के नारंगीपन लिए लाल फूलों की होती हैं। पलाश के लाल-लाल फूल आग की लपटों के समान ही दिखाई देते हैं। इसलिए इसे ‘फ्लेम ऑफ द फायर’ कहा जाता है।

पलाश भारतीय मूल का एक प्राचीन वृक्ष हैं। इसे आदिदेव ब्रह्मा और चंद्रदेव से संबंधित अलौकिक वृक्ष माना जाता है। इसमें एक ही स्थान पर तीन पत्ते होते हैं। इस पर कहावत प्रचलित है- ‘ढाक के तीन पात’। इसकी लकड़ी का हवन में उपयोग किया जाता है। इसीलिए इसे याज्ञिक भी कहते हैं। यज्ञ में काम आने वाले पात्र भी पलाश की लकड़ी से बनाए जाते हैं।

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Chapter: [23] उपयोजित लेखन (रचना विभाग)
Concept: गद्‍य आकलन

युनियन हायस्कूल मुंबई में मनाए गए ‘वृक्षारोपण समारोह’ का 60 से 80 शब्दों में वृत्तांत लेखन कीजिए।

(वृत्तांत में स्थल, काल, घटना का उल्लेख होना अनिवार्य है)

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Chapter: [23] उपयोजित लेखन (रचना विभाग)
Concept: वृत्तांत लेखन

निम्नलिखित जानकारी के आधार पर 50 से 60 शब्दों में विज्ञापन तैयार कीजिए।

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Chapter: [23] उपयोजित लेखन (रचना विभाग)
Concept: विज्ञापन लेखन

निम्नलिखित विषय पर 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए।

मेरा प्रिय खेल

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Chapter: [23] उपयोजित लेखन (रचना विभाग)
Concept: निबंध लेखन

निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

सन 1911 में, सत्येंद्रनाथ ने उच्चतर माध्यमिक की विज्ञान की परीक्षा दी और प्रथम आए। मेघनाथ साहा ने ढाका कॉलेज से परीक्षा दी थी और वरीयता क्रम में वे दूसरे स्थान पर थे। निखिल रंजन सेन ने इस परीक्षा में तीसरा स्थान प्राप्त किया।

सत्येन, निखिल रंजन और मेघनाथ साहा ने विज्ञान स्नातक की पढ़ाई के लिए गणित को चुना। वार्षिक परीक्षा में सत्येंद्र प्रथम आए, मेघनाथ द्वितीय और निखिल रंजन तृतीय। सन 1915 की विज्ञान स्नातकोत्तर की परीक्षा में भी ऐसा ही परिणाम आया।

जल्द ही सत्येन विश्वविद्यालय में 'चौदह चश्मों वाले लड़के' के मशहूर हो गए । वह अपना खाली समय अपने सहपाठियों और निचली कक्षाओं में पढ़ रहे मित्रों को पढ़ाने में व्यतीत करते थे। वह उन्हें हरीश सिन्हा के घर पर पढ़ाते थे। नीरेंद्रनाथ राय और दिलीप कुमार राय को इन कक्षाओं से वहुत लाभ हुआ। इसी दौरान सत्येन 'सबूज पत्र' नामक दल से सक्रिय से जुड़ गए। दल के सदस्य प्रथमा चौघरी के घर पर इकट्ठे होते थे।

(1) उत्तर लिखिए:        [2]

(2) 'ज्ञान देने से ज्ञान बढ़ता है' विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए।      [2]

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Chapter: [23] उपयोजित लेखन (रचना विभाग)
Concept: गद्‍य आकलन

निम्नलिखित जानकारी के आधार पर पत्रलेखन कीजिए:

राजेश/रजनी शर्मा, मातोश्री छात्रालय, चिचेवड से अपने छोटे भाई सयुश शर्मा 'नंदनवन' कालोनी, नांदेड को योग का महत्त्व समझाने हेतु पत्र लिखता/लिखती है।

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Chapter: [23] उपयोजित लेखन (रचना विभाग)
Concept: पत्रलेखन

गुरुकृपा विद्यालय, वीड में मनाए गए ‘स्वतंत्रता दिन’ समारोह का 70 से 80 शब्दों में वृत्तांत लेखन कीजिए।

(वृत्तांत में स्थल, काल घटना का उल्लेख होना अनिवार्य है।)

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Chapter: [23] उपयोजित लेखन (रचना विभाग)
Concept: वृत्तांत लेखन

निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए:

यदि पुस्तकें न होती........

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Chapter: [23] उपयोजित लेखन (रचना विभाग)
Concept: निबंध लेखन

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हों:

वाणी ईश्वर द्वारा मनुष्य को दी गईं एक बड़ी देन है। वह मनुष्य के चिंतन का फलित है और उसका साधन भी। चिंतन के बगैरे वाणी नहीं और वाणी के बगैरे चिंतन नहीं और दोनों के बगैर मनुष्य नहीं।

मनुष्य के जीवन का समाधान वाणी के संयम और उसके सदुपयोग पर निर्भर है। मनुष्य के सारे चिंतनशास्त्र वाणी पर आधारित हैं। दर्शनों का सारा प्रयास विचारों को वाणी में ठीक-से पेश करने के लिए रहा है। वाणी विचार का शरीर ही है। कोई खास विचार किसी खास शब्द में ही समाता है। इसलिए गंभीर चिंतन करने वाले निश्चित वाणी की खोजन करते रहते हैं। 

पतंजली के बारे में कहते हैं कि उसने चित्तशुद्धि के लिए योगसूत्र लिखे, शरीरशुद्धि के लिए वैद्यक लिखा और वाक्शुद्धि के लिए व्याकरण महाभाष्य लिखा।

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Chapter: [23] उपयोजित लेखन (रचना विभाग)
Concept: गद्‍य आकलन

निम्नलिखित जानकारी के आधार पर 50 से 60 शब्दों में विज्ञापन तैयार कीजिए:

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Chapter: [23] उपयोजित लेखन (रचना विभाग)
Concept: विज्ञापन लेखन

निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

          जापानी और चीनी वैज्ञानिकों ने भूकंप आने के कुछ दिन पूर्व जीव-जन्तुओंकी गतिविधियों के आधार पर चेतावनी देने का प्रयत्न किया है। वास्तव में ४ फरवरी, १९७५ को चीन के हाइचेंग क्षेत्र में आए भूकंप का पूर्वानुमान चीनी वैज्ञानिकों ने भूकंप आने के कुछ दिन पूर्व से मेंढकों व साँपों के अपने बिलों से एकाएक बाहर निकल आने, मुर्गियों की बेचैनी और अपने दरबों से दूर भागने तथा कुत्तों के भाैंकने और लगातार इधर-उधर भागने के आधार पर, काफी सफलतापूर्वक किया; परंतु वही वैज्ञानिक सन् १९७६ के विध्वंसक भूकंप की पूर्वसूचना नहीं दे सके। महाराष्ट्र के भूकंप के पूर्व भी वहाँ के निवासियों ने ऐसा दावा किया है कि पालतू पशु विचित्र व्यवहार कर रहे थे। जीव-जन्तुओंके विचित्र व्यवहार के अतिरिक्त, भूकंप पूर्व मिलने वाले कुछ मुख्य संकेत, जिनपर वैज्ञानिक बिरादरी एकमत हैं।

1. उत्तर लिखिए: (2)

चीनी वैज्ञानिकों द्वारा भूकंप आने के पूर्वानुमान लगाने के आधार -

  1. ______
  2. ______

2. 'भूकंप से होने वाली हानि से बचने के उपाय' विषय पर २५ से ३० शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)

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Chapter: [24] अपठित विभाग
Concept: अपठित गद्यांश

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए, जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हों:

        स्वाधीन भारत में अभी तक अंग्रेजी हवाओं में कुछ लोग यह कहते मिलेंगे – जब तक विज्ञान और तकनीकी ग्रंथ हिंदी में न हो तब तक कैसे हिंदी में शिक्षा दी जाए। जब कि स्वामी श्रद्धानंद स्वाधीनता से भी चालीस साल पहले गुरुकुल काँगड़ी में हिंदी के माध्यम से विज्ञान जैसे गहन विषयों की शिक्षा दे रहे थे। ग्रंथ भी हिंदी में थे और पढ़ाने वाले भी हिंदी के थे। जहाँ चाह होती है वहीं राह निकलती है। एक लंबे अरसे तक अंग्रेज गुरुकुल काँगड़ी को भी राष्ट्रीय आंदोलन का अभिन्न अंग मानते रहे। इसमें कोई संदेह भी नहीं कि गुरुकुल के स्नातकों में स्वाधीनता की अजीब तड़प थी। स्वामी श्रद्धानंद जैसा राष्ट्रीय नेता जिस गुरुकुल का संस्थापक हो और हिंदी शिक्षा का माध्यम हो; वहीं राष्ट्रीयता नहीं पनपेगी तो कहाँ पनपेगी। स्वामी जी से मिलने देश के प्रमुख राष्ट्रीय नेता भी गुरुकुल आते रहते थे।

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Chapter: [24] अपठित विभाग
Concept: अपठित गद्यांश

निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

संस्कृति ऐसी चीज नहीं है कि जिसकी रचना दस-बीस या सौ-पचास वर्षों में की जा सकती हो। अनेक शताब्दियों तक एक समाज के लोग जिस तरह खाते-पीते, रहते-सहते, पढ़ते-लिखते, सोचते-समझते और राज-काज चलाते अथवा धर्म-कर्म करते हैं, उन सभी कार्यों से उनकी संस्कृति उत्पन्न होती है। हम जो कुछ भी करते हैं, उसमें हमारी संस्कृति की झलक होती है। यहाँ तक कि हमारे उठने-बैठने, पहनने-ओढ़ने, घूमने-फिरने और रोने-हँसने में भी हमारी संस्कृति की पहचान होती है। हमारा कोई भी काम हमारी संस्कृति का पर्याय नहीं बन सकता।असल में संस्कृति जिंदगी का एक तरीका है और यह तरीका सदियों से जमा होकर उस समाज में छाया रहता है, जिसमें हम जन्म लेते हैं। इसलिए जिस समाज में हम पैदा हुए हैं, अथवा जिस समाज से मिलकर हम जी रहे हैं, उसकी संस्कृति हमारी संस्कृति है।

(1) घटक लिखिए: (2)

(2) विधानों को पढ़कर केवल सही अथवा गलत लिखिए: (2)

  1. समाज के लोगों के कार्यों से उनकी संस्कृति उत्पन होती है ______
  2. हम जो कुछ भी करते हैं, उसमें हमारी संस्कृति की झलक नहीं होती ______
  3. जिस संस्कृति में हम पैदा हुए हैं उसकी संस्कृति हमारी संस्कृति है ______
  4. संस्कृति जिंदगी का तरीका नहीं है ______

(3) दी गई सूचना के अनुसार लिखिए: (2)

(4) ‘पाश्चात्य संस्कृति का बढ़ता प्रभाव’ अपने विचार लिखिए। (2)

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Chapter: [24] अपठित विभाग
Concept: अपठित गद्यांश

निम्नलिखित अपठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

नदी निकलती है पर्वत से, मैदानों में बहती है।
और अंत में मिल सागर से, एक कहानी कहती है।

बचपन में छोटी थी पर मैं, बड़े वेग से बहती थी।
आँधी-तूफाँ, बाढ़-बवंडर, सब कुछ हँसकर सहती थी।

मैदानों में आकर मैंने, सेवा का संकल्प लिया।
और बना जैसे भी मुझसे, मानव का उपकार किया।

अंत समय में बचा शेष जो, सागर को उपहार दिया।
सब कुछ अर्पित करके अपने, जीवन को साकार किया।

(1) कृति पूर्ण कीजिए: (2)

(2) ऐसे प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्तर निम्न शब्द हों: (2)

  1. सागर
  2. छोटी

(3) प्रस्तुत पद्यांश की अंतिम चार पंक्तियों का भावार्थ लिखिए। (2)

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Chapter: [24] अपठित विभाग
Concept: अपठित पद्यांश
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