SSC (Hindi Medium)
Academic Year: 2024-2025
Date & Time: 24th June 2025, 11:00 am
Duration: 3h
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सूचनाएँ:
- सूचनाओं के अनुसार गद्य, पद्य, पूरक पठन तथा भाषा अध्ययन (व्याकरण) की आकलन कृतियों में आवश्यकता के अनुसार आकृतियों में ही उत्तर लिखना अपेक्षित है।
- सभी आकृतियों के लिए पेन का ही प्रयोग करें।
- रचना विभाग में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखने के लिए आकृतियों की आवश्यकता नहीं है।
- शुद्ध, स्पष्ट एवं सुवाच्य लेखन अपेक्षित है।
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
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आपके दो पत्र मिले। मैं शीघ्र उत्तर न दे सका। पिछले दिनों मैं कोलकाता गया था। भारतीय भाषा परिषद के निमंत्रण पर। वहाँ कुछ बहुत पुराने मित्रों से मुलाकात हुई। लोगों के अतिथि सत्कार और स्नेह-सद्भावना से बहुत अधिक अभिभूत हुआ। इस बार काफी लंबी अवधि बाद कोलकाता जाना हुआ...... मैं बहुत उत्सुकता से अपने इस प्रिय शहर को पुनः देखने की प्रतीक्षा कर रहा था। कोलकाता से अधिक स्मरणीय और किंचित उदास स्मृति शांतिनिकेतन की है, जहाँ पहली बार जाने का मौका मिला। रवींद्रनाथ का घर...... या बहुत से घर, जहाँ वह समय-समय पर रहते थे, देखते हुए लगता रहा, जैसे उनकी आत्मा अभी तक वहाँ कहीं आस-पास भटक रही हो। मैंने बहुत से दिवंगत लेखकों के गृह स्थान यूरोप में देखे थे, लेकिन शांतिनिकेतन का अनुभव कुछ अनूठा था...जैसे किसी की अनुपस्थिति वहाँ हर पेड़, घड़ी, पत्थर पर बिछी हो। मैंने वे सब पेड़ हाथों से छुए जिन्हें गुरदेव रवि बाबू ने खुद रोपा था और जिनके नामों का उल्लेख कितनी बार उनके गीतों में सुना था। एक दिन हम शांतिनिकेतन से कुछ दूर उस ग्राम्य प्रदेश को देखने भी गए, जहाँ पावा नदी बहती है...... संथालों की रम्य झोंपड़ियाँ, शाल के खेत और पेड़ों से घिरे पोखर-सबको देखकर अनायास शरत बाबू के बहुत पुराने उपन्यासों का परिवेश याद हो आया, जिन्हें कभी बचपन में पढ़ा था। पश्चिमी बंगाल का प्राकृतिक सौंदर्य भारत के अन्य प्रदेशों से बहुत अलग है। कहते हैं, मानसून के दिनों में वह और भी अधिक रमणीय हो जाता है। |
(1) कृति पूर्ण कीजिए: 2

(2) उत्तर लिखिए: 2
- बंगाल के प्राकृतिक सौंदर्य की विशेषता - ........
- गुरुदेव को पुराने मित्र मिले वह स्थान - ........
(3) ‘मानव जीवन में प्रकृति का स्थान’ विषय पर 30 से 40 शब्दों में अपने विचार लिखिए। 3
Chapter:
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
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आकाश में बिजली की कौंधें बीच-बीच में लपक उठती थीं। बादलों की गड़गड़ाहट सुनकर रामबोला को लगा कि मानो चैनसिंह ठाकुर अपने हलवाहा को डाँट रहे हैं। रामबोला अनायास ही ताव में आ गया। उठा और फिर नये श्रम की साधना में लग गया। दूसरे छप्पर के ढीले पड़ गए अंजर-पंजर को कसने के लिए पास ही खलार में उगी लंबी घास-पतवार उखाड़ लाया। रामबोला ने भिखारी बस्ती के और लोगों को जैसे घास बँटकर रस्सी बनाते देखा था, वैसे ही बँटने लगा। जैसे-तेसे रस्सियाँ बँटी, जस-तस टट्टर बाँधा। अब जो उसकी आधी से अधिक उधड़ी हुई छावन पर ध्यान गया तो नन्हे मन के उत्साह को फिर काठ मार गया। घास-फूस, ज्योनारों में जूठन के साथ-साथ बाहर फेंकी गई पत्तलों और चिथड़े-गुदड़ों से बनाई गई वह छोटी-सी छपरिया फिर से छाने के लिए वह सामान कहाँ से जुटाए? हवा द्वारा उड़ाए हुए माल वह इस बरसात में कहाँ-कहाँ ढूँढ़ैगा। दैव आज प्रलय की बरखा करके ही दम लेंगे। हवा के मारे औरों के छप्पर भी पेंगे ले रहे हैं। अभी तक अपनी-अपनी छावनों को बचाने के लिए सभी तो तूफान से जूझ रहे हें... तब हम अब का करी? हमरौ पेट भुखान है। हम नान्हें से तो हैं हनुमान स्वामी! अब तक थक गए भाई! अब हम अपनी पार्वती अम्मा के लगे जायके पौढ़ेँगे। दैउ बरसै तो बरसा करै। हम क्या करे बजरंगबली, तुम्हीं बताओ। तुमसे बने भाई तो राम जी के दरबार में हमारी गुहार लगाय आओ, औ न बने तो तुमहूं अपनी अम्मा के लगे जायके पौढ़ौ।’ |
(1) प्रवाह तालिका पूर्ण कीजिए: 2

(2) (i) गद्यांश में प्रयुक्त शब्द-युग्म ढूँढ़कर लिखिए: 1
- ...............
- ...............
(ii) गद्यांश में उल्लिखित पौराणिक पात्र: 1
- ...............
- ...............
(3) ‘मानवता ही सच्चा धर्म है।’ विषय पर 30 से 40 शब्दों में अपने विचार लिखिए।
Chapter:
निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
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यों हमारी पूरी दार्शनिक ट्रेनिंग देह के खिलाफ जाती हैं। देह की सेवा बड़ी हीन बात मानी गई हैं। दो-तीन साल पहले एक मठाधीश स्वामीजी ने हमें यह अच्छी तरह समझा दी थी। वे अच्छे पुष्ट और गौरवर्ण संन्यासी थे। तख्त पर बैठे थे और देह की तुच्छता पर ऐसा जोरदार प्रवचन कर रहे थे कि हमें अपने शरीर से घृणा होने लगी थी। अच्छे उपदेशक थे, जो अच्छी-से-अच्छी चीज के प्रति नफरत पैदा कर देते हैं। वे कह रहे थे- “यह मलमूत्र की खान, यह गंदा शरीर मिथ्या है, नाशवान है, क्षणभंगुर है। मूरख इसे स्वादिष्ट पकवान खिलाते हैं, इसे सजाते हैं इसपर इत्र चुपड़ते हैं, वे भूल जाते हैं कि एक दिन यह देह मिट्टी में मिलेगी और इसे कीड़े खाएँगे।” इतने में एक सेवक केसरिया रबड़ी का गिलास लाया और स्वामीजी ने उसे गटक लिया। |
(1) संजाल पूर्ण कीजिए: 2

(2) जोड़ियाँ मिलाइए: 2
| अ | उत्तर | ब |
| (i) संन्यासी | ______ | मिट्टी में मिलेगी |
| (ii) देह | ______ | पापी |
| (iii) मन | ______ | केसरिया रबड़ी |
| (iv) गिलास | ______ | पुष्ट और गौरवर्ण |
(3) ‘कुसंगति का फल बुरा होता है।’ विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। 2
Chapter:
निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
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जसोदा बार-बार यौं भाषै। हे कोऊ ब्रज हितू हमारी चलत गुपालहिं राखै।। कहा काज मेरे छगन-मगन कौं, नृप मधुपुरी बुलायौ। सुफलक सुत मेरे प्रान हरन कौं काल रूप है आयौ। बरु यह गोधन हरौ कंस बस मोहिं बंदि लै मेलौ। इतनोई सुख कमल-नयन मेरी अँखियान आगे खेलौ॥ बासर बदन बिलोकत जीवों, निसि निज अंकम लाऊँ। तिहिं बिछुरत जो जियौं कर्मबस तौ हँसि काहि बुलाऊँ॥ कमलनयन गुन टेरत टेरत, दुखित नंद जु की रानी।। |
(1) आकृति में लिखिए: 2

(2) पद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए: 2
| विलोम शब्द | समानार्थी शब्द |
| (1) रोना × ..... | (1) राजा = ..... |
| (2) दोष × ..... | (2) पुत्र = ..... |
(3) प्रथम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए। 2
Chapter:
निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर पद्य (‘अकथ कथ्यौ न जाइ’) का विश्लेषण कीजिए:
- रचनाकार का नाम - [1]
- रचना की विधा - [1]
- पसंदीदा पंक्तियाँ - [1]
- पंक्तियाँ पसंद होने के कारण - [1]
- कविता प्राप्त संदेश/प्रेरणा - [2]
Chapter:
निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर पद्य ‘उड़ चल, हारिल’ का विश्लेषण कीजिए:
- रचनाकार का नाम - [1]
- रचना की विधा - [1]
- पसंद की पंक्तियाँ - [1]
- पंक्तियाँ पसंद होने का कारण - [1]
- रचना से प्राप्त संदेश/प्रेरणा - [2]
Chapter:
निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
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जिसे मनुष्य अपना समझ भरोसा करता है जब उसी से अपमान और तिरस्कार प्राप्त हो तो मन वितृष्णा से भर जाता है, एकदम मर जाने की इच्छा होने लगती है, उसे शब्दों में बता सकना संभव नहीं। दिलीप ने अपनी पत्नी हेमा को पूर्ण स्वतंत्रता दी थी। वह उसका बहुत आदर करता था, बहुत आंतरिकता से वह उसके प्रति अनुरक्त था। बहुत से लोग इसे ‘अति’ कहेंगे। इसपर भी वह हेमा को संतुष्ट कर सका। जब हेमा, केवल दिलीप के मित्र के साथ सिनेमा देख आने के कारण रात भर रूठी रहकर सुबह उठते ही माँ के घर चली गई तब दिलीप के मन में क्षोभ का अंत न रहा। सितंबर का अंतिम सप्ताह था। दिलीप बैठक की खिड़की और दरवाजों पर परदा डाले बैठा था। वितृष्णा और ग्लानि में, समय स्वयं यातना बन जाता है। एक मिनट गुजारना मुश्किल हो जाता है। उसी समय सीढ़ियों पर से छोटे भाई के धम-धम कर उतरते चले आने का शब्द सुनाई दिया। छोटे भाई ने परदे को हटाकर पूछा था, “भाई जी, आपको कहीं जाना न हो तो मैं मोटरसाइकिल ले जाऊँ?” |
(1) कारण लिखिए: 2
- हेमा का रूठकर माँ के घर चले जाना -
......................... - दिलीप के क्षोभ का अंत न रहना -
.........................
(2) ‘गरीबी उन्नति में बाधा नहीं बनती’ विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। 2
Chapter:
निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
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एक कदम चलते हैं, और चल के ठहर जाते हैं, हम तो अब वक्त की आहट से भी डर जाते हैं। जो भी इस आग के दरिया में उतर जाते हैं, वही तपते हुए सोने-से निखर जाते हैं। भीड़ के साथ चले हैं, वो उधर जाते हैं, हम तो खुद राह बनाते हैं, इधर जाते हैं। मेरी कश्ती का खिवैया है, मुहाफिज तू है, कितने आते हैं यहाँ, कितने भँवर जाते हैं। जब भी आते हैं मेरी आँख में आँसू ‘बेदिल’, जख्म सीने के मेरे, और निखर जाते हैं। |
- उत्तर लिखिए: 2
- डर जाते हैं - ...........
- उतर जाते हैं - ...........
- निखर जाते हैं - ...........
- बनाते हैं - ...........
- ‘सेवा परमोधर्म’ विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। 2
Chapter:
निम्नलिखित अव्यय का अर्थपूर्ण वाक्य में प्रयोग कीजिए:
पास
Chapter:
निम्नलिखित अव्यय का अर्थपूर्ण वाक्य में प्रयोग कीजिए:
क्योंकि
Chapter:
कृति पूर्ण कीजिए:
| शब्द | संधि-विच्छेद | संधि-भेद |
| भानूदय | ........ + ........ | ........ |
Chapter:
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निम्नलिखित सामासिक शब्द का विग्रह करके समास का प्रकार लिखिए:
| शब्द | समास विग्रह | प्रकार |
| हिमालय | ........ | ........ |
Chapter:
निम्नलिखित अलंकार पहचानकर उसका प्रकार और उप-प्रकार लिखिए:
| वाक्य | प्रकार | उप-प्रकार |
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तीन बेर खाती थींं वे तीन बेर खाती हैं। |
Chapter:
निम्नलिखित मुहावरे का अर्थ लिखकर उचित वाक्य में प्रयोग कीजिए:
पत्थर की लकीर होना -
Chapter:
निम्नलिखित मुहावरे का अर्थ लिखकर उचित वाक्य में प्रयोग कीजिए:
टस-से-मस न होना।
Chapter: [3] व्याकरण विभाग (भाषाभ्यास)
निम्नलिखित वाक्य में यथास्थान उचित विरामचिह्नो का प्रयोग कीजिए:
“जी हाँ जी हाँ! बहुत प्यारा बच्चा है” मेरे मित्र ने कहा।
Chapter:
निम्नलिखित वाक्य में से कारक पहचानकर उसका भेद लिखिए:
पल्ला सिर से खिसक गया था।
Chapter:
निम्नलिखित वाक्य शुद्ध करके फिर से लिखिए:
वही उड़ने का रफतार और दिशा तय करता है।
Chapter:
उत्तर लिखिए:
| प्रथम तथा तृतीय चरण की मात्राएँ ______ हैं। | श्री गुरु चरन सरोज रंज, निजमन मुकुर सुधार। बरनौं रघुवर विमल जस जो दायक फल चार॥ |
यह ______ छंद हैं। |
Chapter: [3] व्याकरण विभाग (भाषाभ्यास)
निम्नलिखित वाक्य का सूचना के अनुसार काल परिवर्तन कीजिए:
आवाज अवरुद्ध हो जा रही थी। (पूर्ण वर्तमानकाल)
Chapter:
निम्नलिखित वाक्य का सूचना के अनुसार काल परिवर्तन कीजिए:
एक साथ काम पर आएँगे। (अपूर्ण भूतकाल)
Chapter:
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निम्नलिखित वाक्य का रचना के आधार पर भेद पहचानकर लिखिए:
पिताजी ने चिट्ठी पढ़ी और खुश हो गए।
Chapter:
निम्नलिखित वाक्य का अर्थ के आधार पर दी गई सूचनानुसार परिवर्तन कीजिए:
मोहन बाग में खेलना चाहता है। (आज्ञार्थी वाक्य)
Chapter:
निम्नलिखित जानकारी के आधार पर पत्र-लेखन कीजिए:
आशुतोष/अपुर्वा नागर, सरदार पटेल नगर, नागपुर 440001 से अपने मित्र/सहेली सोनु/सान्वी पांडे, शिवाजीनगर, अकोला 441004 के नाम पत्र लिखकर शारीरिक शिक्षा का महत्त्व समझाता/समझाती है।
Chapter:
निम्नलिखित जानकारी के आधार पर पत्र-लेखन कीजिए:
कल्पेश/कल्पना मुंढे महसूल भवन, गांधी मार्ग अमरावती 44301 से स्वास्थ्य अधिकारी, महापालिका, अमरावती के नाम अपने मुहल्ले की अस्वच्छता की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए शिकायत पत्र लिखता/लिखती हैं।
Chapter:
निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हों:
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अगर पुराने जमाने की नगर-देवता की और ग्राम-देवता की कल्पनाएँ आज भी मान्य होतीं तो मैं कहता कि इलाहाबाद का नगर-देवता जरूर कोई रोमैण्टिक कलाकार है। ऐसा लगता है कि इस शहर की बनावट, गठन, जिंदगी और रहन-सहन में कोई बँधे-बँधाये नियम नहीं, कहीं कोई कसाव नहीं, हर जगह एक स्वच्छन्द खुलाव, एक बिखरी हुई-सी अनियमितता। बनारस की गलियों से भी पतली गलियाँ और लखनऊ की सड़कों से चौड़ी सड़कें। यार्कशायर और ब्राइटन के उपनगरों का मुकाबला करने वाले सिविल लाइन्स और दलदलों की गंदगी को मात करने वाले मुहल्ले। मौसम में भी कहीं कोई सम नहीं, कोई संतुलन नहीं। सुबहें मलयजी, दोपहरें अंगारी, तो शामें रेशमी! धरती ऐसी कि सहारा के रेगिस्तान की तरह बालू भी मिले, मालवा की तरह हरे-भरे खेत भी मिलें और ऊसर और परती की भी कमी नहीं। सचमुच लगता है कि प्रयाग का नगर-देवता स्वर्ग-कुंजों से निर्वासित कोई मनमौजी कलाकार है जिसके सृजन में हर रंग के डोरे हैं। |
Chapter:
छत्रपति शाहू महाराज हिंदी विद्यालय, यवतमाल में मनाए गए “गणतंत्र दिवस” समारोह का 70 से 80 शब्दों में वृत्तांत लिखिए। (वृत्तांत में स्थल, काल, घटना का उल्लेख होना अनिवार्य है।)
Chapter:
निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर लगभग 70 से 80 शब्दों में कहानी लिखकर उसे उचित शीर्षक दीजिए तथा सीख लिखिए:
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दो मित्र - सागर में तूफान - नौका का टूटना - दोनों का एक ही तख्ते का सहारा लेना - तख्ता केवल एक का भार सँभालने में समर्थ - “मेरी माँ को सँभालो” यह कहकर अविवाहित मित्र का तख्ते को छोड़ देना - दूसरे का बचना - सीख। |
Chapter:
निम्नलिखित जानकारी के आधार पर लगभग 50 से 60 शब्दों में विज्ञापन तैयार कीजिए:

Chapter:
निम्नलिखित विषय पर 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए:
वृक्षारोपण: आज की आवश्यकता
Chapter:
निम्नलिखित विषय पर 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए:
मेरे प्रिय अध्यापक
Chapter:
निम्नलिखित विषय पर 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए।
एक किसान की आत्मकथा
Chapter: [4] उपयोगित लेखन (रचना विभाग)
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