हिंदी
महाराष्ट्र स्टेट बोर्डएसएससी (हिंदी माध्यम) १० वीं कक्षा

निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए: आकाश में बिजली की कौंधें बीच-बीच में लपक उठती थीं। - Hindi [हिंदी]

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

आकाश में बिजली की कौंधें बीच-बीच में लपक उठती थीं। बादलों की गड़गड़ाहट सुनकर रामबोला को लगा कि मानो चैनसिंह ठाकुर अपने हलवाहा को डाँट रहे हैं। रामबोला अनायास ही ताव में आ गया। उठा और फिर नये श्रम की साधना में लग गया। दूसरे छप्पर के ढीले पड़ गए अंजर-पंजर को कसने के लिए पास ही खलार में उगी लंबी घास-पतवार उखाड़ लाया। रामबोला ने भिखारी बस्ती के और लोगों को जैसे घास बँटकर रस्सी बनाते देखा था, वैसे ही बँटने लगा। जैसे-तेसे रस्सियाँ बँटी, जस-तस टट्टर बाँधा। अब जो उसकी आधी से अधिक उधड़ी हुई छावन पर ध्यान गया तो नन्हे मन के उत्साह को फिर काठ मार गया। घास-फूस, ज्योनारों में जूठन के साथ-साथ बाहर फेंकी गई पत्तलों और चिथड़े-गुदड़ों से बनाई गई वह छोटी-सी छपरिया फिर से छाने के लिए वह सामान कहाँ से जुटाए? हवा द्वारा उड़ाए हुए माल वह इस बरसात में कहाँ-कहाँ ढूँढ़ैगा। दैव आज प्रलय की बरखा करके ही दम लेंगे। हवा के मारे औरों के छप्पर भी पेंगे ले रहे हैं। अभी तक अपनी-अपनी छावनों को बचाने के लिए सभी तो तूफान से जूझ रहे हें... तब हम अब का करी? हमरौ पेट भुखान है। हम नान्हें से तो हैं हनुमान स्वामी! अब तक थक गए भाई! अब हम अपनी पार्वती अम्मा के लगे जायके पौढ़ेँगे। दैउ बरसै तो बरसा करै। हम क्या करे बजरंगबली, तुम्हीं बताओ। तुमसे बने भाई तो राम जी के दरबार में हमारी गुहार लगाय आओ, औ न बने तो तुमहूं अपनी अम्मा के लगे जायके पौढ़ौ।’

(1) प्रवाह तालिका पूर्ण कीजिए: 2

(2) (i) गद्यांश में प्रयुक्त शब्द-युग्म ढूँढ़कर लिखिए: 1

  1. ...............
  2. ...............

(ii)  गद्यांश में उल्लिखित पौराणिक पात्र: 1

  1. ...............
  2. ...............

(3) ‘मानवता ही सच्चा धर्म है।’ विषय पर 30 से 40 शब्दों में अपने विचार लिखिए।

आकलन
Advertisements

उत्तर

(1)

(2) (i) 

  1. अंजर-पंजर
  2. घास-पतवार

(ii)  

  1. पार्वती
  2. बजरंगबली

(3)

मानवता का सरल अर्थ है,दूसरे मनुष्यों और सभी प्राणियों के प्रति करुणा, सेवा और कल्याण की भावना रखना। परोपकार को ही मानवता कहा जाता है। मानवता हमें केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि संसार के प्रत्येक जीव से प्रेम करना सिखाती है। इसमें जाति, धर्म, संप्रदाय, रंग, भाषा, देश या वर्ग जैसे किसी भी प्रकार के भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं होता। मानवता को सभ्यता और संस्कृति की आधारशिला माना जाता है। हर जीव में उसी एक ईश्वर का अंश देखना मानवता की पहचान है। किसी दुखी या पीड़ित की सहायता करना ईश्वर की सेवा के समान है। हमें निःस्वार्थ भाव से जरूरतमंद लोगों की मदद करनी चाहिए। दूसरों की उन्नति में बाधा बनने के बजाय सहयोग करना ही सच्ची मानवता है। इसलिए कहा जाता है कि ‘मानवता ही सच्चा धर्म है।’

shaalaa.com
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
2024-2025 (July) Official Board Paper
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×