सूरदास जी के अनुसार श्रीकृष्ण अक्रूर के साथ मथुरा जाने के लिए तैयार हो रहे हैं। यह देखकर माता यशोदा बार-बार व्याकुल होकर कहती हैं कि ब्रज में क्या कोई ऐसा हितैषी नहीं है जो मथुरा जाते समय मेरे गोपाल को रोक ले। वे कहती हैं कि मेरे आनंद से भरे कृष्ण और बलराम को न जाने किस कारण राजा ने मथुरा बुला लिया है। यशोदा को लगता है कि सुफलक का पुत्र अक्रूर उनके प्राण हरने के लिए यमराज बनकर आया है।
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प्रश्न
निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
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जसोदा बार-बार यौं भाषै। हे कोऊ ब्रज हितू हमारी चलत गुपालहिं राखै।। कहा काज मेरे छगन-मगन कौं, नृप मधुपुरी बुलायौ। सुफलक सुत मेरे प्रान हरन कौं काल रूप है आयौ। बरु यह गोधन हरौ कंस बस मोहिं बंदि लै मेलौ। इतनोई सुख कमल-नयन मेरी अँखियान आगे खेलौ॥ बासर बदन बिलोकत जीवों, निसि निज अंकम लाऊँ। तिहिं बिछुरत जो जियौं कर्मबस तौ हँसि काहि बुलाऊँ॥ कमलनयन गुन टेरत टेरत, दुखित नंद जु की रानी।। |
(1) आकृति में लिखिए: 2

(2) पद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए: 2
| विलोम शब्द | समानार्थी शब्द |
| (1) रोना × ..... | (1) राजा = ..... |
| (2) दोष × ..... | (2) पुत्र = ..... |
(3) प्रथम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए। 2
आकलन
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उत्तर
(1)

(2)
| विलोम शब्द | समानार्थी शब्द |
| (1) रोना × हँसना | (1) राजा = नृप |
| (2) दोष × गुन | (2) पुत्र = सुत |
(3)
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