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स्काउट परेड करते समय लेखक अपने को महत्वपूर्ण 'आदमी' फ़ौजी जवान क्यों समझने लगता था?

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प्रश्न

स्काउट परेड करते समय लेखक अपने को महत्वपूर्ण 'आदमी' फ़ौजी जवान क्यों समझने लगता था?

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उत्तर

स्काउट परेड में लेखक साफ़-सुथरी धोबी से धुली ड्रेस पहनता। पॉलिश बूट तथा जुराब पहनकर लेखक ठक-ठक करके चलता था। मास्टर प्रतीमचंद द्वारा परेड के समय राइट टर्न या लेफ्ट टर्न या अबाऊट टर्न कहने पर छोटे छोटे बूटों की एड़ियों पर दाएँ-बाएँ या कदम मिलाकर चलता, तो वह अपने आपको फ़ौजी से कम नहीं समझता था। अकड़कर चलता तो अपने अंदर एक फ़ौजी जैसी आन-बान-शान महसूस करता था।

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सपनों के-से दिन
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अध्याय 2: सपनों के-से दिन - बोध-प्रश्न [पृष्ठ ३०]

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एनसीईआरटी Hindi Sanchayan Bhag 2 Class 10
अध्याय 2 सपनों के-से दिन
बोध-प्रश्न | Q 4 | पृष्ठ ३०

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