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लेखक के अनुसार उन्हें स्कूल खुशी से भागे जाने की जगह न लगने पर भी कब और क्यों उन्हें स्कूल जाना अच्छा लगने लगा?

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प्रश्न

लेखक के अनुसार उन्हें स्कूल खुशी से भागे जाने की जगह न लगने पर भी कब और क्यों उन्हें स्कूल जाना अच्छा लगने लगा?

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उत्तर

लेखक के अनुसार उन्हें स्कूल जाना बिल्कूल अच्छा नहीं लगता था परन्तु जब स्कूल में रंग बिरगें झंडे लेकर, गले में रूमाल बाँधकर मास्टर प्रीतमचंद परेड करवाते थे, तो लेखक को बहुत अच्छा लगता था। सब बच्चे ठक-ठक करते राइट टर्न, लेफ्ट टर्न या अवाउट टर्न करते और मास्टर जी उन्हें शाबाश कहते तो लेखक को पूरे साल में मिले 'गुड्डों' से भी ज़्यादा अच्छा लगता था। इसी कारण लेखक को स्कूल जाना अच्छा लगने लगा।

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सपनों के-से दिन
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अध्याय 2: सपनों के-से दिन - बोध-प्रश्न [पृष्ठ ३०]

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एनसीईआरटी Hindi Sanchayan Bhag 2 Class 10
अध्याय 2 सपनों के-से दिन
बोध-प्रश्न | Q 6 | पृष्ठ ३०

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