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पाठ में से उन प्रसंगों की पहचानकर उन पर चर्चा कीजिए, जिनसे पता चलता है कि– बिरजू महाराज बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे।

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प्रश्न

पाठ में से उन प्रसंगों की पहचानकर उन पर चर्चा कीजिए, जिनसे पता चलता है कि–

बिरजू महाराज बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे।

विस्तार में उत्तर
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उत्तर

घर में कथक का माहौल था। उनके पिता, चाचा आदि कथक नर्तक थे, अत: बिरजू महाराज ने औपचारिक प्रशिक्षण से पूर्व ही कथक सीख लिया था और नवाब के दरबार में नृत्य प्रस्तुतियाँ भी देने लगे थे।

  • वे नृत्य के साथ ही बजाते और गाते भी थे। इसके अतिरिक्त नृत्य नाटिकाएँ और उनके लिए संगीत भी तैयार करते थे।
  • उन्होंने कथक की पुरानी परंपरा को कायम रखते हुए अपने परिवार की विरासत को सँभालते हुए प्रस्तुतीकरण का एक नया रूप तैयार किया। इसी प्रकार टैगोर, त्यागराज आदि कई आधुनिक कवियों की रचनाओं को लेकर भी कथक रचनाएँ तैयार कीं ।
  • उन्होंने बहुत छुटपन से ही तबला बजाना शुरू कर दिया था। उनके चाचा ने उनके हाथ की कला और तबले के धुन की लय को पहचाना और उन्हें तबला बजाने के लिए प्रोत्साहित किया। पाँच वर्ष का होते-होते वे हारमोनियम भी बजाने लगे और वे फ़िल्मी गीतों पर भी गाते और खूब नाचते। परिवार से उन्हें इसके लिए सदैव प्रोत्साहन मिलता।
  • मशीनी कामों में भी उनकी रुचि थी। वे पंखा, फ्रिज़ आदि स्वयं ठीक कर लेते थे। उनका कहना था, अगर 1. मैं नर्तक न होता तो शायद इंजीनियर होता।
  • अपनी बेटी-दामाद को देखकर बिरजू महाराज को पेंटिंग बनाने का शौक भी हो गया। जब उनका मन होता, तब वे पेंटिंग भी बनाते थे ।
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अध्याय 8: बिरजू महाराज से साक्षात्कार - पाठ से [पृष्ठ १०६]

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एनसीईआरटी Hindi Malhar Class 7
अध्याय 8 बिरजू महाराज से साक्षात्कार
पाठ से | Q 2. (क) | पृष्ठ १०६
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