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प्रश्न
पाठ में से उन प्रसंगों की पहचानकर उन पर चर्चा कीजिए, जिनसे पता चलता है कि–
बिरजू महाराज को नृत्य की ऊँचाइयों तक पहुँचाने में उनकी माँ का बहुत योगदान रहा।
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उत्तर
संघर्ष के दिनों में बिरजू महाराज की सबसे बड़ी सहयोगी उनकी माँ थीं। आर्थिक तंगी के समय माँ कर्ज लेतीं और पुरानी जरी की साड़ियाँ जलाकर उनके सोने-चाँदी के तार बेचकर घर का गुजारा करतीं। वे बार-बार कहतीं “खाने को भले ही चना मिले या कुछ भी न मिले पर अभ्यास जरूर करो।” माँ का यही उत्साह उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर अभ्यास करने के लिए प्रेरित करता रहा। जब उनकी तालीम शुरू होनी थी, तब पिता ने भेंट मिलने पर ही गंडा बाँधने की बात कही, तो माँ ने बिरजू महाराज के दो कार्यक्रमों की कमाई गुरु को भेंट के रूप में दे दी, जिससे उनकी शिक्षा शुरू हो सकी। इन प्रसंगों से स्पष्ट है कि उन्हें नृत्य की ऊँचाइयों तक पहुँचाने में उनकी माँ का बहुत बड़ा योगदान रहा।
