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प्रश्न
पाठ में आए किन प्रसंगों के आधर पर आप कह सकते हैं कि -
बिस्मिल्ला खाँ मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक थे।
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उत्तर
उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ भारतीय मिली-जुली संस्कृति के सशक्त प्रतीक थे। वे मुस्लिम धर्म का पालन करते हुए उसकी गहरी आस्था रखते थे, साथ ही हिंदू धर्म के प्रति भी पूरा सम्मान भाव रखते थे। मुहर्रम के दौरान वे आठवीं तारीख को खड़े होकर शहनाई बजाते थे और दालमंडी से फातमान तक लगभग आठ किलोमीटर पैदल चलते हुए रोते हुए नौहा प्रस्तुत करते थे।
इसी प्रकार उनकी काशी के प्रति श्रद्धा भी अत्यंत गहरी थी। वे काशी विश्वनाथ मंदिर और बालाजी मंदिर के प्रति विशेष सम्मान रखते थे। जब वे काशी से बाहर होते, तो उन्हीं मंदिरों की दिशा में मुख करके बैठते और शहनाई बजाते थे। वे अक्सर कहा करते थे कि वे काशी को छोड़कर कहीं नहीं जा सकते, क्योंकि उनके लिए गंगा, बाबा विश्वनाथ और बालाजी सब यहीं हैं। वे जीवनभर शहनाई और काशी से अपने संबंध को अटूट मानते थे।
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