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निम्नलिखित वाक्य पढ़ो तथा मोटे और अधोरेखित किये गए शब्दों पर ध्यान दो : जलाशय चॉंदी की भाँति चमचमा रहा था।

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प्रश्न

निम्नलिखित वाक्य पढ़ो तथा मोटे और अधोरेखित किये गए शब्दों पर ध्यान दो :

जलाशय चॉंदी की भाँति चमचमा रहा था।

एक पंक्ति में उत्तर
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उत्तर

की भाँति - संबंधबोधक अव्यय

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व्याकरण
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अध्याय 2.03: दाे लघुकथाएँ - भाषा की ओर [पृष्ठ ३४]

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बालभारती Hindi Sulabhbharati Standard 7 Maharashtra State Board
अध्याय 2.03 दाे लघुकथाएँ
भाषा की ओर | Q १. (९) | पृष्ठ ३४

संबंधित प्रश्न

निम्‍नलिखित समोच्चारित भिन्नार्थक हिंदी शब्द का अर्थ लिखो तथा उन शब्द का अलग-अलग पूर्ण वाक्‍यों में प्रयोग कराे :

हार


कविता (सौहार्द-सौमनस्‍य) में प्रयुक्‍त विलोम शब्‍दों की जोड़ियाँ लिखो।


निम्‍न शब्‍द के पर्यायवाची शब्‍द लिखिए:


शब्‍द कोश की सहायता से रेखांकित शब्द का विलोम खोजिए तथा उससे नया वाक्‍य लिखिए:

डायनासोर प्राणी अब दुर्लभ हो गए हैं।


रेखांकित शब्द से उपसर्ग और प्रत्यय अलग करके लिखिए:

लोग उनकी असफलता पर क्‍या-क्‍या टिप्पणी करेंगे।


रेखांकित वाक्‍यांश के स्‍थान पर उचित मुहावरा लिखिए:

रुग्‍ण शय्या पर पड़ी माता जी को देखकर मोहन का धीरज धीर-धीरे समाप्त हो रहा था।


सहायक क्रिया पहचानिए :

काँच का कार्य पर्यटकों को आश्चर्यचकित कर देता है।


निम्नलिखित मुहावरे/कहावत में से अनुपयुक्त शब्द काटकर उपयुक्त शब्द लिखिए:

गेहूँ - गीला - होना - ______ - ______ - ______


‘हीन’ शब्द का प्रयोग करके कोई तीन अर्थपूर्ण शब्द तैयार करके लिखिए:

जैसे - आत्म + हीन = आत्महीन

(च) ______

(छ) ______

(ज) ______


दाएँ पंख में उपसर्ग तथा बाऍं पंख में प्रत्यय लगाकर शब्द लिखाे तथा उनके वाक्य बनाओ:

__________________

__________________


निम्न प्रकार से मात्रा एवं चिह्नवाले अन्य शब्द बताओ:

काला   बुलबुल   कृपाण   केले   प्रातः
                 
रूमाल   नूपुर   खपरैल   खरगोश   लीची
                 
चौदह   हृदय   चौकोर   पतंग   कुआँ
                 
चिड़िया   पैसे   तितली   संख्याऍं   डॉक्‍टर

चित्र देखकर उचित सर्वनाम में लिखो :

(तू, मैं, वह, यह, क्या, जैसा-वैसा, अपने-आप) 


अशुद्ध शब्द को रेखांकित कर वाक्य शुद्ध करके लिखिए:-

मैं लिखना-पढ़ना करने लगा हूँ।


शब्‍द के वचन पहचान कर परिवर्तन कीजिए एवं अपने वाक्‍य में प्रयोग कीजिए:-

तारा


निर्देशानुसार संधि विच्छेद, संधि तथा उनका नामोल्लेख कीजिए:

संधि संधि विच्छेद संधि का प्रकार
______ वाक् + जाल  

इस निबंध के अंश पढ़कर विदेशी, तत्‍सम, तद्भव शब्‍द समझिए। इसी प्रकार के अन्य पाँच-पाँच शब्‍द ढूँढ़िए।

कुछ भाषाओं के शब्द किसी भी अन्य भाषा से मित्रता कर लेते हैं और उन्हीं में से एक बन जाते हैं। अंग्रेजी भाषा के कई शब्द जिस किसी प्रदेश में गए, वहॉं की भाषाओं में घुलमिल गए। जैसे- ‘बस, रेल, कार, रेडियो, स्टेशन’ आदि। कहा जाता है कि तमिळ भाषा के शब्द केवल अपने परिवार द्रविड़ परिवार तक ही सीमित रहते हैं। वे किसी से घुलना, मिलना नहीं चाहते। अलबत्ता हिंदी के शब्द मिलनसार हैं परंतु सब नहीं; कुछ शब्द तो अंत तक अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखते हैं। अपने मूल रूप में ही वे अन्य स्थानों पर जाते हैं। कुछ शब्द अन्य भाषा के साथ इस प्रकार जुड़ जाते हैं कि उनका स्वतंत्र रूप खत्म-सा हो जाता है।

हिंदी में कुछ शब्‍द ऐसे भी पाए जाते हैं जो दो भिन्न भाषाओं के शब्‍दों के मेल से बने हैं। अब वे शब्‍द हिंदी के ही बन गए हैं। जैसे- हिंदी-संस्‍कृत से वर्षगाँठ, माँगपत्र; हिंदी-अरबी/फारसी से थानेदार, किताबघर; अंग्रेजी-संस्‍कृत से रेलयात्री, रेडियोतरंग; अरबी/फारसी-अंग्रेजी से बीमा पाॅलिसी आदि। इन शब्‍दों से हिंदी का भी शब्द संसार समृद्ध हुआ है। कुछ शब्द अपनी मॉं के इतने लाड़ले होते हैं कि वे मॉं-मातृभाषा को छोड़कर औरों के साथ जाते ही नहीं। कुछ शब्द बड़े बिंदास होते हैं, वे किसी भी भाषा में जाकर अपने लिए जगह बना ही लेते हैं।

शब्दों के इस प्रकार बाहर जाने और अन्य अनेक भाषाओं के शब्दों के आने से हमारी भाषा समृद्ध होती है। विशेषतः वे शब्द जिनके लिए हमारे पास प्रतिशब्द नहीं होते। ऐसे हजारों शब्द जो अंग्रेजी, पुर्तगाली, अरबी, फारसी से आए हैं; उन्हें आने दीजिए। जैसे- ब्रश, रेल, पेंसिल, रेडियो, कार, स्कूटर, स्टेशन आदि परंतु जिन शब्दों के लिए हमारे पास सुंदर शब्द हैं, उनके लिए अन्य भाषाओं के शब्दों का उपयोग नहीं होना चाहिए। हमारे पास ‘मॉं’ के लिए, पिता के लिए सुंदर शब्द हैं, जैसे- माई, अम्मा, बाबा, अक्का, अण्णा, दादा, बापू आदि। अब उन्हें छोड़ मम्मी-डैडी कहना अपनी भाषा के सुंदर शब्दों को अपमानित करना है।

हमारे मुख से उच्चरित शब्द हमारे चरित्र, बुद्‌धिमत्ता, समझ और संस्कारों को दर्शाते हैं इसलिए शब्दों के उच्चारण के पूर्व हमें सोचना चाहिए। कम-से-कम शब्दों में अर्थपूर्ण बोलना और लिखना एक कला है। यह कला विविध पुस्तकों के वाचन से, परिश्रम से साध्य हो सकती है। मात्र एक गलत शब्द के उच्चारण से वर्षों की दोस्ती में दरार पड़ सकती हैं। अब किस समय, किसके सामने, किस प्रकार के शब्दों का प्रयोग करना चाहिए इसे अनुभव, मार्गदर्शन, वाचन और संस्कारों द्वारा ही सीखा जा सकता है। सुंदर, उपयुक्त और अर्थमय शब्दों से जो वाक्य परीक्षा में लिखे जाते हैं उस कारण ही अच्छी श्रेणी प्राप्त होती है। अनाप-शनाप शब्दों का प्रयोग हमेशा हानिकारक होता है।

प्रत्येक व्यक्ति के पास स्वयं की शब्द संपदा होती है। इस शब्द संपदा को बढ़ाने के लिए साहित्य के वाचन की जरूरत होती है। शब्दों के विभिन्न अर्थों को जानने के लिए शब्दकोश की भी जरूरत होती है। शब्दकोश का एक पन्ना रोज एकाग्रता से पढ़ोगे तो शब्द संपदा की शक्ति का पता चल जाएगा।

तो अब तय करो कि अपनी शब्द संपदा बढ़ानी है। इसके लिए वाचन-संस्कृति को बढ़ाओ। पढ़ना शुरू करो। तुम भी शब्द संपदा के मालिक हो जाओगे।


रिक्त स्थान की पूर्ति अव्यय शब्‍द से कीजिए और नया वाक्‍य बनाइए:

लेखकों ______ वक्‍ताओं की न जाने क्‍या दुर्दशा होती।



निम्नलिखित वाक्य में रेखांकित शब्द के लिए सही शब्द का चयन कीजिए:

संकट की घड़ी में ऋण प्रदान करने के लिए श्रीलंका, विश्वबैंक का कृतघ्न है।


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