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प्रश्न
मातृभाषया व्याख्यायन्ताम् –
हेमन्तशिशिरौ तुल्यौ शिशिरेऽल्पं विशेषणम्।
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उत्तर
प्रसंग – प्रस्तुत श्लोकांश हमारी पाठ्य-पुस्तक भास्वती प्रथमो-भागः के याय ऋतुचर्या’ में से उद्धृत किया गया है। यह अध्याय महर्षि चरक द्वारा प्रणीत ग्रन्थ ‘चरक संहिता’ में से संकलित है। इस अध्याय में छ’ ऋतुओं में मनुष्य को अपनी भोजनचर्या किस प्रकार रखनी चाहिए – इसका विवेचन किया गया है। शिशिर ऋतु का वर्णन करते हुए महर्षि चरक कहते हैं –
हेमन्त तथा शिशिर दोनों ऋतुएँ लगभग समान ही हैं, शिशिर में हेमन्त से थोड़ी-सी ही भिन्नता है, वह यह कि – खाने पीने से तथा शीतल वायु से इस समय रूखापन अधिक हो जाता है। अतः ऐसे घर के अन्दर रहना चाहिए जिससे तेज वायु कष्टदायक न हो और भोजन तथा पेय पदार्थ भी चिकनाईयुक्त अधिक लेने चाहिएँ जिससे रूखापन न होने पाए।
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अधोलिखितानि विग्रहपदानि आधृत्य समस्तपदानि रचयत –
| विग्रहपदानि | समस्तपदाने | समासनाम |
| हेमन्त: च शिशिर: च | ______ | द्वंद्व समास |
अधोलिखितानि विग्रहपदानि आधृत्य समस्तपदानि रचयत –
| विग्रहपदानि | समस्तपदाने | समासनाम |
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अधोलिखितानि विग्रहपदानि आधृत्य समस्तपदानि रचयत –
| विग्रहपदानि | समस्तपदाने | समासनाम |
| कायस्य अग्निम् | ______ | तत्पुरुष समास |
अधोलिखितानि विग्रहपदानि आधृत्य समस्तपदानि रचयत –
| विग्रहपदानि | समस्तपदाने | समासनाम |
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| पदानि | अर्थाः |
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| निचितः | भारी |
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| लघु | रूखापन |
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| पदानि | विपरीतार्थकपदानि |
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प्रकृति प्रत्ययं च योजयित्वा पदनिर्माणं कुरुत –
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