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प्रश्न
क्या कहानी में ऐसे कुछ और भी तत्व हो सकते हैं जिनको नाटक में ढालना मुश्किल होता है? सहपाठियों एवं शिक्षकों की मदद से ऐसे तत्वों पर विचार करें।
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उत्तर
हाँ, कहानी में ऐसे कई तत्व हो सकते हैं जिन्हें नाटक में ढालना कठिन होता है। कहानी में लेखक पात्रों की मनःस्थिति, विचारों, भावनाओं, स्मृतियों और कल्पनाओं का विस्तार से वर्णन कर सकता है, लेकिन नाटक में इन्हें सीधे दिखाना आसान नहीं होता। नाटक मुख्य रूप से संवाद, अभिनय, हाव-भाव, मंच-सज्जा, प्रकाश, ध्वनि और मंचीय क्रियाओं पर आधारित होता है।
उदाहरण के लिए, कहानी में किसी पात्र के मन में चल रहे विचारों को लेखक कई पंक्तियों में बता सकता है, लेकिन नाटक में उसे संवाद, एकालाप, हाव-भाव या अभिनय के माध्यम से व्यक्त करना पड़ेगा। इसी प्रकार किसी पात्र की पुरानी स्मृति या कल्पना को मंच पर दिखाने के लिए फ्लैशबैक, प्रकाश-व्यवस्था, ध्वनि या अलग दृश्य का सहारा लिया जा सकता है।
कहानी में लेखक प्रकृति, वातावरण या किसी घटना का लंबा वर्णन भी कर सकता है, जबकि नाटक में इतने लंबे वर्णन की गुंजाइश कम होती है। इसलिए उसे मंच-सज्जा, पार्श्व संगीत, ध्वनि-प्रभाव और प्रकाश के द्वारा संक्षेप में प्रस्तुत करना पड़ता है।
इस प्रकार कहानी के विचार, मनोभाव, स्मृतियाँ, कल्पनाएँ और लंबे वर्णन ऐसे तत्व हैं जिन्हें नाटक में रूपांतरित करना चुनौतीपूर्ण होता है। नाटककार इन तत्वों को संवाद, अभिनय और विभिन्न मंचीय साधनों की सहायता से दर्शकों के सामने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।
