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कहानी और नाटक में क्या-क्या समानताएँ होती हैं?

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प्रश्न

कहानी और नाटक में क्या-क्या समानताएँ होती हैं?

समानताएं
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उत्तर

समानता का बिंदु कहानी में भूमिका कहानी में भूमिका
कथानक पूरी कहानी एक केंद्रीय कथानक या घटना पर टिकी होती है। पूरे नाटक का मंचन एक निश्चित कथानक के आधार पर होता है।
पात्र पात्रों के माध्यम से कहानी आगे बढ़ती है। अभिनेता पात्र बनकर कहानी को मंच पर जीवंत करते हैं।
द्वंद्व पात्रों के बीच का टकराव कहानी में रोचकता लाता है। विचारों या परिस्थितियों का द्वंद्व नाटक की मुख्य जान है।
द्वंद्व दृश्यों को स्पष्ट और सजीव बनाने के लिए संवाद होते हैं। पूरा नाटक पात्रों के आपसी संवादों पर ही आधारित होता है।
परिवेश लेखक शब्दों से समय और स्थान का वातावरण बनाता है। मंच की सजावट और प्रकाश से समय-स्थान दिखाया जाताflip है।
चरमोत्कर्ष घटनाएँ अंत में एक रोमांचक चरम बिंदु तक पहुँचती हैं। नाटक का सस्पेंस अंत में अपने उच्चतम बिंदु पर पहुँचता है।
उद्देश्य पाठक को एक निश्चित सीख, संदेश या मनोरंजन देना। दर्शक के मन पर एक गहरा प्रभाव या संदेश छोड़ना।
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अध्याय 11: कैसे करें कहानी का नाट्य रूपांतरण - पाठ से संवाद [पृष्ठ १४४]

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एनसीईआरटी Hindi Abhivyakti aur Madhyam Class 11 and 12
अध्याय 11 कैसे करें कहानी का नाट्य रूपांतरण
पाठ से संवाद | Q 1. | पृष्ठ १४४
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