Advertisements
Advertisements
प्रश्न
‘कुट’, ‘कुटज’ और ‘कुटनी’ शब्दों का विश्लेषण कर उनमें आपसी संबंध स्थापित कीजिए।
Advertisements
उत्तर
‘कुट’ का अर्थ घड़ा होता है। ‘कुट’ का आशय घर से भी लिया जाता है। ‘कुटज’ का अर्थ घड़े से उत्पन्न होना है। घड़े से उत्पन्न होने के कारण अगस्त्य मुनि को भी ‘कुटज’ कहा गया। ‘कुटनी’ शब्द का अर्थ है – अनुचित आचरण करने वाली दासी या प्रतिकूल परिस्थितियाँ उत्पन्न करने वाली। जिस प्रकार घर में रहने वाला बालक बचपन में दासी की देखभाल में रहता है, वही संबंध इनका भी माना जाता है। कुटज हिमालय पर्वत रूपी घर की ऊँचाई पर उगने वाला पौधा है। यह क्रोधित यमराज के प्रबल श्वास जैसी तपती लू में भी जीवित रहता है। ये तीनों शब्द एक ही मूल शब्द ‘कुट’ से उत्पन्न हुए हैं।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
‘नाम’ क्यों बड़ा है? लेखक के विचार अपने शब्दों में लिखिए।
कुटज किस प्रकार अपनी अपराजेय जीवनी-शक्ति की घोषणा करता है?
‘कुटज’ हम सभी को क्या उपदेश देता है? टिप्पणी कीजिए।
कुटज के जीवन से हमें क्या सीख मिलती है?
कुटज क्या केवल जी रहा है - लेखक ने यह प्रश्न उठाकर किन मानवीय कमज़ोरियों पर टिप्पणी की है?
निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-
‘कभी-कभी जो लोग ऊपर से बेहया दिखते हैं, उनकी जड़ें काफ़ी गहरी पैठी रहती हैं। ये भी पाषाण की छाती फाड़कर न जाने किस अतल गह्हर से अपना भोग्य खींच लाते हैं।’
निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-
‘रूप व्यक्ति-सत्य है, नाम समाज-सत्य। नाम उस पद को कहते हैं जिस पर समाज की मुहर लगी होती है। आधुनिक शिक्षित लोग जिसे ‘सोशल सैक्शन’ कहा करते हैं। मेरा मन नाम के लिए व्याकुल है, समाज द्वारा स्वीकृत, इतिहास द्वारा प्रमाणित, समष्टि-मानव की चित्त-गंगा में स्नात!’
निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-
‘रूप की तो बात ही क्या है! बलिहारी है इस मादक शोभा की। चारों ओर कुपित यमराज के दारुण निःश्वास के समान धधकती लू में यह हरा भी है और भरा भी है, दुर्जन के चित्त से भी अधिक कठोर पाषाण की कारा में रुद्ध अज्ञात जलस्रोत से बरबस रस खींचकर सरस बना हुआ है।’
निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-
‘हृदयेनापराजितः! कितना विशाल वह हृदय होगा जो सुख से, दुख से, प्रिय से, अप्रिय से विचलित न होता होगा! कुटज को देखकर रोमांच हो आता है। कहाँ से मिलती है यह अकुतोभया वृत्ति, अपराजित स्वभाव, अविचल जीवन दृष्टि!’
कुटज को ‘गाढ़े का साथी’ क्यों कहा गया है?
