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प्रश्न
बहुविकल्पी प्रश्न
कृष्ण को जगाने के लिए द्वार पर कौन खड़े हैं?
विकल्प
सारे ग्वाल-बाल
यशोदा
राधा
देव और दानव
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उत्तर
देव और दानव
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संबंधित प्रश्न
बहुविकल्पी प्रश्नोत्तर
कठपुतली गुस्से से क्यों उबल पड़ी
नीचे कुछ चीज़ों के नाम लिखें हैं। चुरुंगुन ने पहले किसे देखा? क्रम से लगाओ।
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फूल, पात, फुनगी, दाल, फल, कलियाँ, धरती, साथी, तरु, दाना, गगन
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तुम्हारे घर के पास कौन-कौन से पेड़-पौधे, पशु-पक्षी आमतौर पर नज़र आते हैं? उनकी सूची बनाओ।
नीचे कविता में से पंक्ति दी गई हैं। बताओ, इस पंक्ति का क्या अर्थ हो सकता है?
हमको तुमको प्रान मिलेगा।
अपनी सूची में से किसी एक के बारे में बताओ कि उसे मान-सम्मान कैसे मिल सकता है?
रिक्त स्थान पूरे करो।
| नमूना → |
वह मोर सा नाचता है। |
लक्की ________की तरह गरजता है।
किन पंक्तियों से पता चलता है कि कविता में माँ-बेटी या माँ-बेटे के बीच बातचीत हो रही है?
यह कविता आज़ादी मिलने से पहले के समय में लिखी गई थी। उस समय हमारे देश पर अंग्रेज़ों का राज था। किन पंक्तियों से पता चलता है कि लड़का/लड़की के काका स्वतंत्रता सेनानी थे?
कुछ ऐसे देशभक्तों के नाम-पता करके लिखो जो बचपन से ही आज़ादी की लड़ाई में कूद पड़े थे।
बताओ तुम ये काम कैसे करोगे? शिक्षक से भी सहायता लो।
जनता को एक करना
बहुत से लोग पक्षी पालते हैं-
क्या आपने या आपकी जानकारी में किसी ने कभी कोई पक्षी पाला है? उसकी देखरेख किस प्रकार की जाती होगी, लिखिए।
पहली कठपुतली की बात दूसरी कठपुतलियों को क्यों अच्छी लगी?
शाम के बदले यदि आपको एक कविता सुबह के बारे में लिखनी हो तो किन-किन चीजों की मदद लेकर अपनी कल्पना को व्यक्त करेंगे? नीचे दी गई कविता की पंक्तियों के आधार पर सोचिए
पेड़ों के झुनझुने
बजने लगे;
लुढ़कती आ रही है।
सूरज की लाल गेंद।
उठ मेरी बेटी, सुबह हो गई।
अंधकार दूर सिमटा कैसा लग रहा है?
‘जल को मछलियों से कोई प्रेम नहीं होता’ इसका क्या प्रमाण है?
रहीम ने क्वार मास के बादलों को कैसा बताया है?
आस-पास के लोगों ने क्या उपहास किया?
नीचे दी गई पंक्ति का आशय अपने शब्दों में लिखिए-
‘माखन-रोटी हाथ मँह लीनी, गउवन के रखवारे।’
माता यशोदा अपने कृष्ण को किस प्रकार और क्या कहकर जगा रही है?
नमूने के अनुसार लिखो:
| नमूना → |
छोड़ घोंसला बाहर आया. देखी डालें, देखे पात।
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| चुरुंगन घोंसला छोड़कर बाहर आया। उसने डालें और पत्ते देखे। |
डाली से डाली पर पहुँचा,
देखी कलियाँ देखे फूल।
