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।। जीवन चलता ही रहता।।

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प्रश्न

।। जीवन चलता ही रहता।।

लघु उत्तरीय
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उत्तर

गतिमानता ही जीवन का प्रतीक है, इसलिए जीवन कभी रुकता नहीं है। यह हमेशा चलता ही रहता है। इस धरा पर जो भी आया है उसे एक न एक दिन अपने शरीर का त्याग करना ही पड़ता है, लेकिन उसकी आत्मा की मृत्यु नहीं होती है। जिस तरह समय-समय पर पोथी की जिल्द बदलती रहती है, उसी तरह आत्मा अपने शरीर रूपी जिल्द को बदलती रहती है। एक शरीर को त्याग कर वह दूसरे शरीर को धारण करती है और जीवन का नया संचार करती है। इस तरह जीवन का क्रम रुकता नहीं वह हमेशा चलता ही रहता है।

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उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
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अध्याय 1.08: जीवन नहीं मरा करता है - विचार मंथन [पृष्ठ २४]

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बालभारती Hindi Sulabhbharati Standard 7 Maharashtra State Board
अध्याय 1.08 जीवन नहीं मरा करता है
विचार मंथन | Q (१) | पृष्ठ २४
बालभारती Hindi Sulabhbharati Ekatmik Standard 7 Maharashtra State Board
अध्याय 8.1 जीवन नहीं मरा करता है
पाठ्य प्रश्न | Q १. | पृष्ठ ५९

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