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प्रश्न
''या आपा को डारि दे, दया करै सब कोय।''
''ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोय।''
इन दोनों पंक्तियों में 'आपा' को छोड़ देने या खो देने की बात की गई है। 'आपा' किस अर्थ में प्रयुक्त हुआ है? क्या 'आपा' स्वार्थ के निकट का अर्थ देता है या घमंड का?
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उत्तर
यहाँ 'आपा' शब्द घमंड के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है। इस कारण वह दूसरे को हीन समझता है।
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