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प्रश्न
गांधी जी प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट थे। स्पष्ट कीजिए।
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उत्तर
गांधी जी भली-भाँति जानते थे कि शुद्ध आदर्शों को आचरण में नहीं लगाया जा सकता है फिर भी उनकी दृष्टि आदर्श से हटी नहीं। उन्होंने अपने आदर्शों से समझौता किए बिना व्यावहारिक आदर्शवाद को अपनाया तथा मर्यादित एवं श्रेष्ठ व्यवहार करते हुए जीवन बिताया।
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(2) शुद्ध आदर्श में व्यावहारिकता का पुट देने से लाभ हुआ हो।
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इसका क्या कारण हो सकता है? 'पतझर में टूटी पत्तियाँ पाठ में 'झेन की देन' हमें जो सीख प्रदान करती है, क्या वह मृगाक्षी के लिए सही साबित हो सकती है? स्थिति का मूल्यांकन करते हुए अपने विचार लिखिए।
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