हिंदी

‘व्यवहारवाद’ समाज के लिए किस प्रकार हानिकारी है?

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

‘व्यवहारवाद’ समाज के लिए किस प्रकार हानिकारी है?

टिप्पणी लिखिए
Advertisements

उत्तर

‘व्यवहारवाद’ अर्थात् ‘लाभ-हानि’ की गणना करके किया गया व्यवहार। इसे अवसरवादिता भी कहा जा सकता है। मनुष्य जब अपने लाभ, उन्नति और भलाई के लिए आदर्शों को त्याग दे तब मानवीय मूल्यों का पतन हो जाता है। ऐसा व्यवहारवाद समाज को पतनोन्मुख बनाता है।

shaalaa.com
पतझर में टूटी पत्तियाँ
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 2.7: पतझर में टूटी पत्तियाँ - अतिरिक्त प्रश्न

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Sparsh Bhag 2 [English] Class 10
अध्याय 2.7 पतझर में टूटी पत्तियाँ
अतिरिक्त प्रश्न | Q 7

संबंधित प्रश्न

शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना अलग क्यों होता है?


पाठ के संदर्भ में शुद्ध आदर्श क्या है?


लेखक ने जापानियों के दिमाग में 'स्पीड' का इंजन लगने की बात क्यों कही है?


जापान में जहाँ चाय पिलाई जाती है, उस स्थान की क्या विशेषता है?


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों मेंलिखिए
चाजीन ने कौन-सी क्रियाएँ गरिमापूर्ण ढंग से पूरी कीं?


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों मेंलिखिए
चाय पीने के बाद लेखक ने स्वयं में क्या परिवर्तन महसूस किया?


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों मेंलिखिए
गाँधीजी में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी; उदाहरण सहित इस बात की पुष्टि कीजिए?


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों मेंलिखिए
लेखक के मित्र ने मानसिक रोग के क्या-क्या कारण बताए? आप इन कारणों से कहाँ तक सहमत हैं?


निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए 
जब व्यवहारिकता का बखान होने लगता है तब 'प्रेक्टिकल आइडियालिस्टों' के जीवन से आदर्श धीरे-धीरे पीछे हटने लगते हैं और उनकी व्यवहारिक सूझ-बूझ ही आगे आने लगती है?


गांधी जी के आदर्शों पर आधारित पुस्तकें पढ़िए; जैसे- महात्मा गांधी द्वारा रचित ‘सत्य के प्रयोग’ और गिरिराज किशोर द्वारा रचित उपन्यास ‘गिरमिटिया’।


पाठ में वर्णित ‘टी-सेरेमनी’ का शब्द चित्र प्रस्तुत कीजिए।


‘टी-सेरेमनी’ की चाय का लेखक पर क्या असर हुआ?


भारत में भी लोगों की जिंदगी की गतिशीलता में खूब वृद्धि हुई है। इसके कारण और परिणाम का उल्लेख ‘झेन की देन’ पाठ के आधार पर कीजिए।


‘झेन की देन’ पाठ से आपको क्या संदेश मिलता है?


भ्रमण हम सभी के जीवन का अभिन्‍न अंग है। अपनी व्यस्ततम दिनचर्या के बीच चैन से भरे कुछ पल शायद हम इसी प्रकार निकाल सकते हैं। शांत वातावरण मैं अपने तथा अपनों के लिए जीवन व्यतीत करना आवश्यक है।

आपके दवारा इस पाठ्यक्रम में पढ़े गए पाठ में चैन भरे पल बिताने के लिए लेखक ने क्या किया? क्या वास्तव में सभी को इसकी आवश्यकता है? अपने विचार व्यक्त कीजिए।


‘झेन की देन’ पाठ के आधार पर बताइए कि पर्णकुटी में चाय पीने के बाद लेखक ने स्वयं में क्या-क्या परिवर्तन महसूस किए?


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×