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प्रश्न
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एक दिन फली, नाज़ू और उनके दोस्त पिलू मामी के साथ समुद्र तट पर घूमने गए। पानी और रेत में खूब खेलने के बाद बच्चों ने आकाशी झूले में चक्कर लगाए, भेलपूरी खाई और गुब्बारे भी खरीदे। बाद में सभी ने मज़े से ठंडी-ठंडी कुल्फ़ी खाई। कुल्फ़ी वाले ने गलती से सात के बजाए पाँच कुल्फ़ी के ही पैसे माँगे। बच्चों ने सोचा ‘चलो पैसे बच गए।’ पर पिलू मामी ने कुल्फ़ीवाले को सही हिसाब समझाया और सात कुल्फ़ियों के ही पैसे दिए। उस दिन बच्चों ने पिलू मामी से जो बात सीखी, उसे शायद वे कभी नहीं भूलेंगे। |
- अपनी कल्पना से, इस कहानी का अंत बदलकर कॉपी में लिखो।
- क्या तुम्हारे परिवार में भी कोई पिलू मामी की तरह है? कौन?
- अगर पिलू मामी कम पैसे देकर वहाँ से चलीं जातीं, तो बच्चे इस बारे में क्या सोचते? तुम इस बारे में क्या सोचते हो?
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उत्तर
- कुल्फ़ीवाला बहुत खुश हो गया, और उसने एक कुल्फी को उपहार के रूप में पेश किया लेकिन पिलू मामी ने उपहार स्वीकार नहीं किया।
- हाँ, मेरे घर में मेरी माँ पिलू मामी की तरह हैं। कई बार बाजार में दुकान वाले गलती से कम पैसे बतलाते हैं लेकिन मेरी माँ उसे ठीक कर पूरे पैसे देती है।
- बच्चे सोचते कि पिलू मामी गलत तथा बेईमान हैं। मेरी भी यही सोच है।
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