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प्रश्न
d-ब्लॉक के तत्वों में कौन से तत्व संक्रमण श्रेणी के तत्व नहीं कहे जा सकते?
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उत्तर
Zn, Cd तथा Hg का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास सामान्य सूत्र (n – 1)d10 ns2 से प्रदर्शित किया जाता है। इन तत्वों में कक्षक मूल (सामान्य) अवस्था में तथा साधारण ऑक्सीकरण अवस्थाओं में भी पूर्णपूरित होते हैं अर्थात् इनकी परमाण्विक अवस्था अथवा किसी भी एक आयनिक अवस्था में उपकोश अपूर्ण नहीं होते हैं, इसलिए इन्हें संक्रमण तत्व नहीं कहा जा सकता।
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(संकेत – इसके उच्च ΔaHΘ और ΔhydHΘ पर ध्यान दें।)
Cr2+ और Fe2+ में से कौन प्रबल अपचायक है और क्यों?
+3 ऑक्सीकरण अवस्था में ऑक्सीकृत होने के संदर्भ में Mn2+ के यौगिक Fe2+ के यौगिकों की तुलना में अधिक स्थायी क्यों हैं?
प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास किस सीमा तक ऑक्सीकरण अवस्थाओं को निर्धारित करते हैं? उत्तर को उदाहरण देते हुए स्पष्ट कीजिए।
संक्रमण तत्वों की मूल अवस्था में नीचे दिए गए d इलेक्ट्रॉनिक विन्यासों में कौन-सी ऑक्सीकरण अवस्था स्थायी होगी?
3d3, 3d5, 3d8 तथा 3d4
संक्रमण धातुओं के अभिलक्षण क्या हैं? ये संक्रमण धातु क्यों कहलाती हैं?
M2+/M तथा M3+/M2+ निकाय के संदर्भ में कुछ धातुओं के EΘ के मान नीचे दिए गए हैं।
| Cr2+/Cr | −0.9 V |
| Mn2+/Mn | −1.2 V |
| Fe2+/Fe | −0.4 V |
| Cr3/Cr2+ | −0.4 V |
| Mn3+/Mn2+ | +1.5 V |
| Fe3+/Fe2+ | +0.8 V |
उपरोक्त आँकड़ों के आधार पर निम्नलिखित पर टिप्पणी कीजिए –
अम्लीय माध्यम में Cr3+ या Mn3+ की तुलना में Fe3+ का स्थायित्व।
आप निम्नलिखित को किस प्रकार से स्पष्ट करेंगे –
d4 स्पीशीज़ में से Cr2+ प्रबल अपचायक है, जबकि मैंगनीज (III) प्रबल ऑक्सीकारक है।
आप निम्नलिखित को किस प्रकार से स्पष्ट करेंगे –
आयनों का d1 विन्यास अत्यंत अस्थायी है।
आंतरिक संक्रमण तत्व क्या हैं?
