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प्रश्न
स्पष्ट कीजिए कि Cu+ आयन जलीय विलयन में स्थायी नहीं है, क्यों? समझाइए।
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उत्तर
\[\ce{Cu^{+}_{ (aq)}}\] से \[\ce{Cu^{2+}_{ (aq)}}\] अधिक स्थायी होता है। इसका कारण यह है कि कॉपर की द्वितीय आयनन एन्थैल्पी अधिक होती है, परंतु \[\ce{Cu^{2+}_{ (aq)}}\] के लिए ΔhydH, \[\ce{Cu^{+}_{ (aq)}}\] की तुलना में अधिक ऋणात्मक होती है, इसलिए यह कॉपर की द्वितीय आयनन एन्थैल्पी के लिए अधिक क्षतिपूर्ति करती है। अत: अनेक कॉपर (I) यौगिक जलीय विलयन में अस्थायी होते हैं तथा निम्नलिखित प्रकार असमानुपातित होते हैं –
\[\ce{2Cu^{+}_{ (aq)} -> Cu^{2+}_{ (aq)} + Cu_{(s)}}\]
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आयोडाइड आयन
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आयरन (II) विलयन
M2+/M तथा M3+/M2+ निकाय के संदर्भ में कुछ धातुओं के EΘ के मान नीचे दिए गए हैं।
| Cr2+/Cr | −0.9 V |
| Mn2+/Mn | −1.2 V |
| Fe2+/Fe | −0.4 V |
| Cr3/Cr2+ | −0.4 V |
| Mn3+/Mn2+ | +1.5 V |
| Fe3+/Fe2+ | +0.8 V |
उपरोक्त आँकड़ों के आधार पर निम्नलिखित पर टिप्पणी कीजिए –
समान प्रक्रिया के लिए क्रोमियम अथवा मैंगनीज धातुओं की तुलना में आयरन के ऑक्सीकरण में सुगमता।
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