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प्रश्न
भ्रमण हम सभी के जीवन का अभिन्न अंग है। अपनी व्यस्ततम दिनचर्या के बीच चैन से भरे कुछ पल शायद हम इसी प्रकार निकाल सकते हैं। शांत वातावरण मैं अपने तथा अपनों के लिए जीवन व्यतीत करना आवश्यक है।
आपके दवारा इस पाठ्यक्रम में पढ़े गए पाठ में चैन भरे पल बिताने के लिए लेखक ने क्या किया? क्या वास्तव में सभी को इसकी आवश्यकता है? अपने विचार व्यक्त कीजिए।
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उत्तर
भ्रमण एक प्रकार का योग है, जो हमारे तन और मन को स्वस्थ रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि हम नियमित रूप से भ्रमण करें तो हम अनेक बीमारियों से दूर रहते हुए एक स्वस्थ और खुशहाल जीवन व्यतीत कर सकते हैं। भ्रमण के दौरान एक-एक कदम बढ़ाते हुए हम हर पल को महसूस करते हैं और अपने आप से मुलाकात कर पाते हैं। आज की व्यस्त दिनचर्या में इस प्रकार के चैन भरे पल मिल जाएँ, तो वह हमें ताजगी से भर देते हैं।
हमारे पाठ्यक्रम के पाठ ‘झेन की देन’ में लेखक ‘रविंद्र केलेकर’ ने जापान की एक विशेष प्रकार की टी सेरेमनी का अनुभव किया था। वह ध्यान की एक पारंपारिक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से जापान के लोग आज भी अपनी तनाव भरी दिनचर्या में से कुछ चैन भरे पल पा लेते हैं और खुद को फिर से संघर्ष करने के लिए तैयार करते हैं। इस तरह के पल अपने लिए निकालना निस्संदेह आज की बड़ी आवश्यकताओं में से एक है, क्योंकि हमारे पास अनगिनत सुख साधन हों, किंतु मन और मस्तिष्क शांति और सुकून का अनुभव न कर सके, तो हम किसी अन्य साधन का लाभ नहीं उठा सकते।
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इसका क्या कारण हो सकता है? 'पतझर में टूटी पत्तियाँ पाठ में 'झेन की देन' हमें जो सीख प्रदान करती है, क्या वह मृगाक्षी के लिए सही साबित हो सकती है? स्थिति का मूल्यांकन करते हुए अपने विचार लिखिए।
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60-70 शब्दों में लिखिए:
"हमारे सामने जो वर्तमान क्षण है वही सत्य है। उसी में जीना चाहिए।" ‘झेन की देन’ पाठ से उद्धृत लेखक का यह कथन वर्तमान परिस्थितियों में कहाँ तक सत्य है? क्या आप इससे सहमत हैं? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
