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प्रश्न
‘डायरी का एक पन्ना’ के माध्यम से अपने गुलाम भारत के स्वतंत्रता दिवस के आयोजन के विषय में जाना। आज हम आज़ाद भारत में आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। देश के प्रति अपने कर्तव्यों को बताते हुए पाठ से प्राप्त सीख का वर्णन कीजिए।
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उत्तर
भारत देश को आज़ाद हुए 75 वर्ष हो गए हैं। हर साल हम 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं, किंतु इस वर्ष हमने आज़ादी का अमृत महोत्सव मनाया और याद किया कि यह आज़ादी हमने किस कीमत पर पाई थी, 75 वर्षों में हमने विकास की कितनी सीढ़ियों को पार किया और आज देश के प्रति हमारे क्या कर्तव्य बनते हैं। हमारा सौभाग्य है कि हम एक स्वतंत्र देश के नागरिक हैं। उस स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए तथा अपने देश को नई उपलब्धियों से संवारने के लिए हमें एकजुट होकर आगे बढ़ना होगा। आज जिन सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक बुराइयों ने हमारे देश को कमजोर बनाया हुआ है, उन बुराइयों से अपने देश को आज़ाद करना होगा। यह सब केवल सरकारी नीतियों से नहीं हम सब के दृढ़ निश्चय और प्रयास से संभव हो पाएगा। जैसा कि पाठ ‘डायरी का एक पन्ना’ ने सिद्ध किया है कि जब समाज कृत संकल्प होकर आगे आता है तो ऐसा कोई कार्य नहीं जो असंभव है। उस समन्वित प्रयास का ही परिणाम ही हमें आज़ादी के रूप में प्राप्त हुआ है और उस आज़ादी को बनाए रखने हेतु हमें संकीर्णताओं से आज़ाद होकर आगे बढ़ना होगा।
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