Advertisements
Advertisements
प्रश्न
आशय स्पष्ट कीजिए -
प्रकाश बाहर नहीं है, उसे अंतर में खोजो। अंतर में बुझी उस ज्योति को जगाओ।
Advertisements
उत्तर
पहला मित्र एक साधु बन जाता है। वह लोगों को भीतर के अंधकार दूर करने और अपने अंदर प्रकाश ढूँढने के लिए कहता है। वह कहता है कि मनुष्य अपने अंदर के अँधेरे से डर जाता है और प्रकाश की तलाश में भटकता रहता है। वह कहता है कि प्रकाश हमारे अंदर ही होता है। अतः हमें चाहिए कि निराशा और दुख को हटाकार ज्ञान रूपी प्रकाश को ढूँढने की। वह ज्योति हमारे अविश्वास के कारण बुझ गई है। अतः हमें उसे जगाना चाहिए।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
लेखक ने टार्च बेचनेवाली कंपनी का नाम 'सूरज छाप' ही क्यों रखा?
पाँच साल बाद दोनों दोस्तों की मुलाकात किन परिस्थितियों में और कहाँ होती है?
पहला दोस्त मंच पर किस रूप में था और वह किस अँधेरे को दूर करने के लिए टार्च बेच रहा था?
भव्य पुरुष ने कहा - 'जहाँ अंधकार है वहीं प्रकाश है।' इसका क्या तात्पर्य है?
भीतर के अँधेरे की टार्च बेचने और 'सूरज छाप' टार्च बेचने के धंधे में क्या फ़र्क है? पाठ के आधार पर बताइए।
'सवाल के पाँव ज़मीन में गहरे गड़े हैं। यह उखड़ेगा नहीं।' इस कथन में मनुष्य की किस प्रवृत्ति की ओर संकेत है और क्यों?
'व्यंग्य विधा में भाषा सबसे धारदार है।' परसाई जी की इस रचना को आधार बनाकर इस कथन के पक्ष में अपने विचार प्रकट कीजिए।
आशय स्पष्ट कीजिए -
क्या पैसा कमाने के लिए मनुष्य कुछ भी कर सकता है?
आशय स्पष्ट कीजिए -
धंधा वही करूँगा, यानी टार्च बेचूँगा। बस कंपनी बदल रहा हूँ।
लेखक ने ‘सूरज छाप’ टॉर्च को नदी में क्यों फेंक दिया? क्या आप भी वही करते?
टॉर्च बेचने वाले किस प्रकार की स्किल प्रयोग करते हैं? इसका 'स्किल इंडिया’ प्रोग्राम से कोई संबंध है?
'पैसा कमाने की लिप्सा ने आध्यामत्मिकता को भी एक व्यापार बना दिया है।' इस विषय पर कक्षा में परिचर्चा कीजिए।
समाज में फैले अंधविश्वासों का उल्लेख करते हुए एक लेख लिखिए।
एन.सी.ई.आर.टी. द्वारा हरिशंकर परसाई पर बनाई गई फ़िल्म देखिए।
