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प्रश्न
आप निम्नलिखित को किस प्रकार से स्पष्ट करेंगे –
जलीय विलयन में कोबाल्ट (II) स्थायी है परंतु संकुलनकारी अभिकर्मकों की उपस्थिति में यह सरलतापूर्वक ऑक्सीकृत हो जाता है।
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उत्तर
संकुलनकारी अभिकर्मकों की उपस्थिति में क्रिस्टल क्षेत्र स्थिरीकरण ऊर्जा, कोबाल्ट की तृतीय आयनन एन्थैल्पी से अधिक होती है। इस प्रकार Co (II) सरलता से Co (III) में ऑक्सीकृत हो जाता है।
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\[\ce{M^{2+}_{ (aq)}}\] ion (Z = 27) के लिए ‘प्रचक्रण-मात्र' चुंबकीय आघूर्ण की गणना कीजिए।
कारण देते हुए स्पष्ट कीजिए।
संक्रमण धातुएँ सामान्यतः रंगीन यौगिक बनाती हैं।
कारण देते हुए स्पष्ट कीजिए।
संक्रमण धातुएँ तथा इनके अनेक यौगिक उत्तम उत्प्रेरक का कार्य करते हैं।
M2+/M तथा M3+/M2+ निकाय के संदर्भ में कुछ धातुओं के EΘ के मान नीचे दिए गए हैं।
| Cr2+/Cr | −0.9 V |
| Mn2+/Mn | −1.2 V |
| Fe2+/Fe | −0.4 V |
| Cr3/Cr2+ | −0.4 V |
| Mn3+/Mn2+ | +1.5 V |
| Fe3+/Fe2+ | +0.8 V |
उपरोक्त आँकड़ों के आधार पर निम्नलिखित पर टिप्पणी कीजिए –
समान प्रक्रिया के लिए क्रोमियम अथवा मैंगनीज धातुओं की तुलना में आयरन के ऑक्सीकरण में सुगमता।
प्रथम संक्रमण श्रेणी में कौन-सी धातु बहुधा तथा क्यों +1 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाती हैं?
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निम्नलिखित संकुल स्पीशीज़ के चुंबकीय आघूर्णो के मान से आप क्या निष्कर्ष निकालेंगे?
| उदाहरण | चुंबकीय आघूर्ण (BM) |
| K2[MnCl4] | 5.9 |
अंतराकाशी यौगिक संक्रमण धातुओं के लिए भली प्रकार से ज्ञात क्यों हैं?
