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आप भी अपने दैनिक अनुभवों को डायरी में लिखिए।

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प्रश्न

आप भी अपने दैनिक अनुभवों को डायरी में लिखिए।

विस्तार में उत्तर
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उत्तर

अपनी दैनिक गतिविधियों को डायरी के रूप में लिखकर व्यवस्थित किया जा सकता है। इसके लिए एक डायरी रखें और उसमें प्रतिदिन किए जाने वाले सभी कार्यों को क्रमवार लिखें। उदाहरण के लिए, यदि आप सुबह 6 बजे उठते हैं, स्नान करते हैं, ईश्वर का स्मरण करते हैं और नाश्ता करते हैं, तो इन सभी कार्यों को समय के अनुसार दर्ज करें। इसके बाद दिनभर के अन्य कार्यों को भी उनके निर्धारित समय के साथ लिखते जाएँ। इस प्रकार डायरी लिखने से आपकी दिनचर्या सुव्यवस्थित बनी रहेगी। प्रतिदिन सुबह अपनी डायरी देखकर आप अपने कार्यों को बेहतर ढंग से संचालित कर सकते हैं और अपनी दिनचर्या को अधिक प्रभावी बना सकते हैं।

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एक कहानी यह भी
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अध्याय 14: मन्नू भंडारी - एक कहानी यह भी - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ ७६]

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एनसीईआरटी Hindi Kshitij Bhag 2 Class 10
अध्याय 14 मन्नू भंडारी - एक कहानी यह भी
प्रश्न-अभ्यास | Q 9. | पृष्ठ ७६

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लेखिका ने बचपन में अपने भाइयों के साथ गिल्ली डंडा तथा पतंग उड़ाने जैसे खेल भी खेले किंतु लड़की होने के कारण उनका दायरा घर की चारदीवारी तक सीमित था। क्या आज भी लड़कियों के लिए स्थितियाँ ऐसी ही हैं या बदल गई हैं, अपने परिवेश के आधार पर लिखिए।


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निम्नलिखित पठित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए -

यों खेलने को हमने भाइयों के साथ गिल्ली-डंडा भी खेला और पतंग उड़ाने, काँच पीसकर माँजा सूतने का काम भी किया, लेकिन उनकी गतिविधियों का दायरा घर के बाहर ही अधिक रहता था और हमारी सीमा थी घर। हाँ, इतना जरूर था कि उस जमाने में घर की दीवारें घर तक ही समाप्त नहीं हो जाती थीं बल्कि पूरे मोहल्ले तक फैली रहती थीं इसलिए मोहल्ले के किसी भी घर में जाने पर कोई पाबंदी नहीं थी, बल्कि कुछ घर तो परिवार का हिस्सा ही थे। आज तो मुझे बड़ी शिद्दत के साथ यह महसूस होता है कि अपनी ज़िंदगी खुद जीने के इस आधुनिक दबाव ने महानगरों के फ़्लैट में रहने वालों को हमारे इस परंपरागत 'पड़ोस-कल्चर' से विच्छिन्न करके हमें कितना संकुचित, असहाय और असुरक्षित बना दिया है। मेरी कम-से-कम एक दर्जन आरंभिक कहानियों के पात्र इसी मोहल्ले के हैं जहाँ मैंने अपनी किशोरावस्था गुज़ार अपनी युवावस्था का आरंभ किया था। एक-दो को छोड़कर उनमें से कोई भी पात्र मेरे परिवार का नहीं है। बस इनको देखते-सुनते, इनके बीच ही मैं बड़ी हुई थी लेकिन इनकी छाप मेरे मन पर कितनी गहरी थी, इस बात का अहसास तो मुझे कहानियाँ लिखते समय हुआ। इतने वर्षों के अंतराल ने भी उनकी भाव-भंगिमा, भाषा, किसी को भी धुँधला नहीं किया था और बिना किसी विशेष प्रयास के बड़े सहज भाव से वे उतरते चले गए थे।
  1. भाइयों की गतिविधियों का दायरा घर के बाहर रहने और बहनों की सीमा घर होने का क्या अभिप्राय है?
    1. लड़कियों एवं लड़कों में आत्मीयता और बंधुत्व नहीं था।
    2. भाई-बहन एक साथ ज़्यादा समय नहीं बिताते थे।
    3. लड़कों को पूरे संसार की आज़ादी थी पर लड़कियाँ घरों के दायरे में सीमित।
    4. लड़के अधिकतर मोहल्ले में भटकते थे जबकि लड़कियाँ घर में रहती थीं।
  2. 'घर की दीवारें घर तक ही समाप्त नहीं हो जाती' - से आप क्या समझते हैं?
    1. घर में आज की तरह दीवारें नहीं होती थीं।
    2. पूरे-मोहल्ले को घर का हिस्सा माना जाता था।
    3. पुराने समय में घर बड़े होते थे, न कि माचिस की डिब्बियाँ।
    4. लोग खुले दिल के थे इसलिए अपने घर में अज़नबियों को भी जगह देते थे।
  3. लेखिका ने अपने पात्रों के विषय में जो बताया है उसके अनुसार असत्य कथन है -
    1. उनकी आरंभिक कहानियों के पात्र बाद के जीवन से आए हैं।
    2. उनके एक-दो पात्रों को छोड़ दें तो कोई उनके परिवार से नहीं।
    3. जिस मोहल्ले में उनकी किशोरावस्था बीती वहीं से लगभग दर्जन भर पात्र लिए।
    4. आरंभिक कहानियों के पात्रों को देखते-सुनते उनके बीच ही लेखिका बड़ी हुई।
  4. 'पड़ोस कल्चर' से अलग होकर हम कैसे होते जा रहे हैं?
    1. संकुचित, असहाय और सुरक्षित
    2. संकुचित, शंकालु और असुरक्षित
    3. संकुचित, असहाय और संरक्षित 
    4. संकुचित, असहाय और असुरक्षित
  5. कहानियाँ लिखते हुए लेखिका को क्या अहसास हुआ?
    1. समय बीतने के कारण उनकी स्मृति अब क्षीण पड़ रही है।
    2. इतना समय बीतने के बाद भी उन्हें वे लोग अपने हावभाव के साथ याद थे।
    3. अपने परिचित व्यक्ति के बारे में लिखना आसान तो नहीं है।
    4. समय के अंतराल ने उनकी भाव-भंगिमा, भाषा आदि को धुँधला कर दिया था।

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