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HSC Science (General) 12th Standard Board Exam - Maharashtra State Board Question Bank Solutions

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फीचर लेखन के सोपानों को स्पष्ट कीजिए ।

[15] व्यावहारिक हिंदी : फीचर लेखन
Chapter: [15] व्यावहारिक हिंदी : फीचर लेखन
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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर ८० से १०० शब्दों में लिखिए:

फीचर लेखन करते समय बरती जाने वाली सावधानियों पर प्रकाश डालिए।

[15] व्यावहारिक हिंदी : फीचर लेखन
Chapter: [15] व्यावहारिक हिंदी : फीचर लेखन
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भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम पर फीचर लेखन कीजिए।

[15] व्यावहारिक हिंदी : फीचर लेखन
Chapter: [15] व्यावहारिक हिंदी : फीचर लेखन
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लता मंगेशकर पर फीचर लेखन कीजिए ।

[15] व्यावहारिक हिंदी : फीचर लेखन
Chapter: [15] व्यावहारिक हिंदी : फीचर लेखन
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‘सूत्र संचालक के कारण कार्यक्रम में चार चाँद लगते हैं’, इसे स्पष्ट कीजिए।

[16] व्यावहारिक हिंदी : मैं उद्घोषक
Chapter: [16] व्यावहारिक हिंदी : मैं उद्घोषक
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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग १०० से १२० शब्दों में लिखिए:

उत्तम मंच संचालक बनने के लिए आवश्यक गुण विस्तार से लिखिए।

[16] व्यावहारिक हिंदी : मैं उद्घोषक
Chapter: [16] व्यावहारिक हिंदी : मैं उद्घोषक
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सूत्र संचालन के विविध प्रकारों पर प्रकाश डालिए।

[16] व्यावहारिक हिंदी : मैं उद्घोषक
Chapter: [16] व्यावहारिक हिंदी : मैं उद्घोषक
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अपने कनिष्ठ महाविद्‌यालय में मनाए जाने वाले ‘हिंदी दिवस समारोह’ का सूत्र संचालन कीजिए।

[16] व्यावहारिक हिंदी : मैं उद्घोषक
Chapter: [16] व्यावहारिक हिंदी : मैं उद्घोषक
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शहर के प्रसिद्ध संगीत महोत्सव का मंच संचालन कीजिए ।

[16] व्यावहारिक हिंदी : मैं उद्घोषक
Chapter: [16] व्यावहारिक हिंदी : मैं उद्घोषक
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ब्लॉग लेखन सेतात्पर्य ।

[17] व्यावहारिक हिंदी : ब्लॉग लेखन
Chapter: [17] व्यावहारिक हिंदी : ब्लॉग लेखन
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ब्लॉग प्रारंभ करने की प्रक्रिया ।

[17] व्यावहारिक हिंदी : ब्लॉग लेखन
Chapter: [17] व्यावहारिक हिंदी : ब्लॉग लेखन
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निम्नलिखित का उत्तर लगभग ८० से १०० शब्दों में लिखिए:

ब्लॉग लेखन में बरती जानेवाली सावधानियों पर प्रकाश डालिए।

[17] व्यावहारिक हिंदी : ब्लॉग लेखन
Chapter: [17] व्यावहारिक हिंदी : ब्लॉग लेखन
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अपने शहर की विशेषताओं पर ब्लॉग लेखन कीजिए।

[17] व्यावहारिक हिंदी : ब्लॉग लेखन
Chapter: [17] व्यावहारिक हिंदी : ब्लॉग लेखन
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ग्रामीण समस्याओं पर ब्लॉग लेखन कीजिए।

[17] व्यावहारिक हिंदी : ब्लॉग लेखन
Chapter: [17] व्यावहारिक हिंदी : ब्लॉग लेखन
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निम्नलिखित का उत्तर लगभग ८० से १०० शब्दों में लिखिए:

प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीवों द्‌वारा प्रकाश उत्पन्न करने के उद्देश्यों की जानकारी दीजिए।

[18] व्यावहारिक हिंदी : प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव
Chapter: [18] व्यावहारिक हिंदी : प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव
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प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीवों की वैज्ञानिक अध्ययन की दृष्टि से जानकारी लिखिए।

[18] व्यावहारिक हिंदी : प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव
Chapter: [18] व्यावहारिक हिंदी : प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव
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समुद्री जीवों पर शोधपूर्ण आलेख पढ़ें।

[18] व्यावहारिक हिंदी : प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव
Chapter: [18] व्यावहारिक हिंदी : प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव
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प्रकाश उत्पन्न करने वाले किसी एक जीव की खोज कीजिए ।

[18] व्यावहारिक हिंदी : प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव
Chapter: [18] व्यावहारिक हिंदी : प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव
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निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए: 

‘‘वे मुझे बर्दाश्त नहीं कर सकते, यदि मुझपर हँसें नहीं। मेरी मानसिक और नैतिक महत्ता लोगों के लिए असहनीय है। उन्हें उबाने वाली खूबियों का पुंज लोगों के गले के नीचे कैसे उतरे? इसलिए मेरे नागरिक बंधु या तो कान पर उँगली रख लेते हैं या बेवकूफी से भरी हँसी के अंबार के नीचे ढँक देते हैं मेरी बात।’’ शॉ के इन शब्दों में अहंकार की पैनी धार है, यह कहकर हम इन शब्दों की उपेक्षा नहीं कर सकते क्योंकि इनमें संसार का एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण सत्य कह दिया गया है।

संसार में पाप है, जीवन में दोष, व्यवस्था में अन्याय है, व्यवहार में अत्याचार... और इस तरह समाज पीड़ित और पीड़क वर्गों में बँट गया है। सुधारक आते हैं, जीवन की इन विडंबनाओं पर घनघोर चोट करते हैं। विडंबनाएँ टूटती-बिखरती नजर आती हैं पर हम देखते हैं कि सुधारक चले जाते हैं और विडंबनाएँ अपना काम करती रहती हैं।

आखिर इसका रहस्य क्या है कि संसार में इतने महान पुरुष, सुधारक, तीर्थंकर, अवतार, संत और पैगंबर आ चुके पर यह संसार अभी तक वैसा-का-वैसा ही चल रहा है।

(१) आकृति पूर्ण कीजिए: (२)

  1. संसार में - 
  2. जीवन में - 
  3. व्यवस्था में - 
  4. व्यवहार में -

(२) निम्नलिखित शब्दों के लिए गद्यांश में आए हुए शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए: (२)

  1. ढेर -
  2. धारदार - 
  3. शोषक -
  4. उपहास -

(३) ‘समाजसेवा ही ईश्वरसेवा है’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)

[6] पाप के चार हथियार
Chapter: [6] पाप के चार हथियार
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निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

          बदले वक्त के साथ बदलते समय के नये मूल्यों को भी पहचानकर हमें अपनाना है पर यहाँ ‘पहचान’ शब्द को रेखांकित करो। बिना समझे, बिना पहचाने कुछ भी नया अपनाने से लाभ के बजाय हानि उठानी पड़ सकती है।

          पश्चिमी दुनिया का हर मूल्य हमारे लिए नये मूल्य का पर्याय नहीं हो सकता। हमारे बहुत-से पुराने मूल्य अब इतने टूट-फूट गए हैं कि उन्हें भी जैसे-तैसे जोड़कर खड़ा करने का मतलब होगा, अपने आधार को कमजोर करना। या यूँ भी कह सकते हैं कि अपनी अच्छी परंपराओं को रूढ़ि में ढालना।

          समय के साथ अपना अर्थ खो चुकी या वर्तमान प्रगतिशील समाज को पीछे ले जाने वाली समाज की कोई भी रीति-नीति रूढ़ि है, समय के साथ अनुपयोगी हो गए मूल्यों को छोड़ती और उपयोगी मूल्यों को जोड़ती निरंतर बहती धारा परंपरा है, जो रूढ़ि की तरह स्थिर नहीं हो सकती।

           यही अंतर है दोनों में। रूढ़ि स्थिर है, परंपरा निरंतर गतिशील। एक निरंतर बहता निर्मल प्रवाह, जो हर सड़ी-गली रूढ़ि को किनारे फेंकता और हर भीतरी-बाहरी, देशी-विदेशी उपयोगी मूल्य को अपने में समेटता चलता है। इसीलिए मैंने पहले कहा है कि अपने टूटे-फूटे मूल्यों को भरसक जोड़कर खड़ा करने से कोई लाभ नहीं, आज नहीं तो कल, वे जर्जर मूल्य भरहराकर गिरेंगे ही।

(१) कारण लिखिए: (२)

  1. बदले वक्‍त के साथ नए मूल्यों को पहचानकर हमें अपनाना है
  2. अपने टूटे-फूटे मूल्यों को भरसक जोड़कर खड़ा करने से कोई नहीं है

(२) उपर्युक्त गद्यांश में प्रयुक्त शब्द-युग्म ढूँढ़कर लिखिए: (२)

(१)  
(२)  
(३)  
(४)  

(३) ‘बदलते समय के साथ हमारे मूल्यों में भी परिवर्तन आवश्यक है’ इस विषय पर अपना मत ४० से ५० शब्दों में स्पष्ट कीजिए। (२)

[8] सुनो किशोरी
Chapter: [8] सुनो किशोरी
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