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Commerce (English Medium) Class 12 - CBSE Question Bank Solutions for Hindi (Core)

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Hindi (Core)
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नीचे दिए गए विशिष्ट भाषा-प्रयोग के उदाहरण को ध्यान से पढ़िए और इसकी अर्थ-छवि स्पष्ट कीजिए-

खोटे सिक्कों की टकसाल जैसी पत्नी

[10] महादेवी वर्मा : भक्तिन
Chapter: [10] महादेवी वर्मा : भक्तिन
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नीचे दिए गए विशिष्ट भाषा-प्रयोग के उदाहरण को ध्यान से पढ़िए और इसकी अर्थ-छवि स्पष्ट कीजिए-

अस्पष्ट पुनरावृत्तियाँ और स्पष्ट सहानुभूतिपूर्ण

[10] महादेवी वर्मा : भक्तिन
Chapter: [10] महादेवी वर्मा : भक्तिन
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‘बहनोई’ शब्द ‘बहन (स्त्री.) + ओई’ से बना है। इस शब्द में हिंदी भाषा की एक अनन्य विशेषता प्रकट हुई है। पुंलिंग शब्दों में कुछ स्त्री-प्रत्यय जोड़ने से स्त्रीलिंग शब्द बनाने की एक समान प्रकिया कई भाषाओं में दिखती है, पर स्त्रीलिंग शब्द में कुछ पुं. प्रत्यय जोड़कर पुंलिंग शब्द बनाने की घटना प्रायः अन्य भाषाओं में दिखलाई नहीं पड़ती है। यहाँ पुं. प्रत्यय ‘ओई’ हिंदी की अपनी विशेषता है। ऐसे कुछ और शब्द उनमें लगे पुं. प्रत्ययों की हिंदी तथा और भाषाओं में खोज करें।
[10] महादेवी वर्मा : भक्तिन
Chapter: [10] महादेवी वर्मा : भक्तिन
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पाठ में आए लोकभाषा के इस संवाद को समझकर इसे खड़ी बोली हिंदी में ढालकर प्रस्तुत कीजिए।

ई कउन बड़ी बात आय। रोटी बनाय जानित है, दाल राँध लेइत है, साग-भाजी छँउक सकित है, अउर बाकी का रहा।

[10] महादेवी वर्मा : भक्तिन
Chapter: [10] महादेवी वर्मा : भक्तिन
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भक्तिन पाठ में पहली कन्या के दो संस्करण जैसे प्रयोग लेखिका के खास भाषाई संस्कार की पहचान कराता है, साथ ही ये प्रयोग कथ्य को संप्रेषणीय बनाने में भी मददगार हैं। वर्तमान हिंदी में भी कुछ अन्य प्रकार की शब्दावली समाहित हुई है। नीचे कुछ वाक्य दिए जा रहे हैं जिससे वक्ता की खास पसंद का पता चलता है। आप वाक्य पढ़कर बताएँ कि इनमें किन तीन विशेष प्रकार की शब्दावली का प्रयोग हुआ है? इन शब्दावलियों या इनके अतिरिक्त अन्य किन्हीं विशेष शब्दावलियों का प्रयोग करते हुए आप भी कुछ वाक्य बनाएँ और कक्षा में चर्चा करें कि ऐसे प्रयोग भाषा की समृद्धि में कहाँ तक सहायक है?

  1. अरे! उससे सावधान रहना! वह नीचे से ऊपर तक वायरस से भरा हुआ है। जिस सिस्टम में जाता है उसे हैंग कर देता है।
  2. घबरा मत! मेरी इनस्वींगर के सामने उसके सारे वायरस घुटने टेकेंगे। अगर ज़्यादा फ़ाउल मारा तो रेड कार्ड दिखा के हमेशा के लिए पवेलियन भेज दूँगा।
  3. जानी टेंसन नई लेने का वो जिस स्कूल में पढ़ता है अपुन उसका हैडमास्टर है।
[10] महादेवी वर्मा : भक्तिन
Chapter: [10] महादेवी वर्मा : भक्तिन
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बाज़ार का जादू चढ़ने और उतरने पर मनुष्य पर क्या-क्या असर पड़ता है?

[11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
Chapter: [11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
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बाज़ार में भगत जी के व्यक्तित्व का कौन-सा सशक्त पहलू उभरकर आता है? क्या आपकी नज़र में उनका आचरण समाज में शांति-स्थापित करने में मददगार हो सकता है?
[11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
Chapter: [11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
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‘बाज़ारूपन’ से क्या तात्पर्य है?

[11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
Chapter: [11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
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बाज़ार किसी का लिंग, जाति, धर्म या क्षेत्र नहीं देखता; वह देखता है सिर्फ़ उसकी क्रय शक्ति को। इस रूप में वह एक प्रकार से सामाजिक समता की भी रचना कर रहा है। आप इससे कहाँ तक सहमत हैं?
[11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
Chapter: [11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
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आप अपने तथा समाज से कुछ ऐसे प्रसंग का उल्लेख करें-

जब पैसा शक्ति के परिचायक के रूप में प्रतीत हुआ।

[11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
Chapter: [11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
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आप अपने तथा समाज से कुछ ऐसे प्रसंग का उल्लेख करें-

जब पैसे की शक्ति काम नहीं आई।

[11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
Chapter: [11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
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बाज़ार दर्शन पाठ में बाज़ार जाने या न जाने के संदर्भ में मन की कई स्थितियों का ज़िक्र आया है। आप इस स्थिति से जुड़े अपने अनुभव का वर्णन कीजिए।

मन खाली हो

[11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
Chapter: [11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
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बाज़ार दर्शन पाठ में किस प्रकार के ग्राहकों की बात हुई है? आप स्वयं को किस श्रेणी का ग्राहक मानते/मानती हैं?

[11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
Chapter: [11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
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आप बाज़ार की भिन्न-भिन्न प्रकार की संस्कृति से अवश्य परिचित होंगे। मॉल की संस्कृति और सामान्य बाज़ार और हाट की संस्कृति में आप क्या अंतर पाते हैं? पर्चेज़िंग पावर आपको किस तरह के बाज़ार में नज़र आती है?
[11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
Chapter: [11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
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लेखक ने पाठ में संकेत किया है कि कभी-कभी बाज़ार में आवश्यकता ही शोषण का रूप धारण कर लेती है। क्या आप इस विचार से सहमत हैं? तर्क सहित उत्तर दीजिए।

[11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
Chapter: [11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
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स्त्री माया न जोड़े यहाँ माया शब्द किस ओर संकेत कर रहा है?
[11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
Chapter: [11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
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विजयदान देथा की कहानी ‘दुविधा’ (जिस पर ‘पहेली’ फ़िल्म बनी है) के अंश को पढ़ कर आप देखेंगे/देखेंगी कि भगत जी की संतुष्ट जीवन-दृष्टि की तरह ही गड़रिए की जीवन-दृष्टि है, इससे आपके भीतर क्या भाव जगते हैं?

गड़रिया बगैर कहे ही उस के दिल की बात समझ गया,
पर अँगूठी कबूल नहीं की। काली दाढ़ी के बीच पीले दाँतों
की हँसी हँसते हुए बोला- ‘मैं कोई राजा नहीं हूँ जो न्याय
की कीमत वसूल करूँ। मैंने तो अटका काम निकाल
दिया। और यह अँगूठी मेरे किस काम की! न यह
अँगुलियों में आती है, न तड़े में। मेरी भेड़ें भी मेरी तरह
गँवार हैं। घास तो खाती हैं, पर सोना सुँघती तक नहीं।
बेकार की वस्तुएँ तुम अमीरों को ही शोभा देती हैं।’

– विजयदान देथा

[11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
Chapter: [11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
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बाज़ार पर आधारित लेख नकली सामान पर नकेल ज़रूरी का अंश पढ़िए और नीचे दिए गए बिंदुओं पर कक्षा में चर्चा कीजिए।

(क) नकली सामान के खिलाफ़ जागरूकता के लिए आप क्या कर सकते हैं?

(ख) उपभोक्ताओं के हित को मद्देनज़र रखते हुए सामान बनाने वाली कंपनियों का क्या नैतिक दायित्व है?

(ग) ब्रांडेड वस्तु को खरीदने के पीछे छिपी मानसिकता को उजागर कीजिए?

नकली सामान पर नकेल जरूरी

अपना क्रेता वर्ग बढ़ाने की होड़ में एफएमसीजी यानी तेज़ी से बिकने वाले उपभोक्ता उत्पाद बनाने वाली कंपनियाँ गाँव के बाजारों में नकली सामान भी उतार रही हैं। कई उत्पाद ऐसे होते हैं जिन पर न तो निर्माण तिथि होती है और न ही उस तारीख का जिक्र होता है जिससे पता चले कि अमुक सामान के इस्तेमाल की अवधि समाप्त हो चुकी है। आउटडेटेड या पुराना पड़ चुका सामान भी गाँव-देहात के बाजारों में खप रहा है। ऐसा उपभोक्ता मामलों के जानकारों का मानना है। नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन के सदस्य की मानें तो जागरूकता अभियान में तेज़ी लाए बगैर इस गोरखधंधे पर लगाम कसना नामुमकिन है।

उपभोक्ता मामलों की जानकार पुष्पा गिरि माँ जी का कहना है, ‘इसमें दो राय नहीं कि गाँव-देहात के बाजारों में नकली सामान बिक रहा है। महानगरीय उपभोक्ताओं को अपने शिकंजे में कसकर बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ, खासकर ज़्यादा उत्पाद बेचने वाली कंपनियाँ, गाँव का रुख कर चुकी हैं। वे गाँववालों के अज्ञान और उनके बीच जागरूकता के अभाव का पूरा फ़ायदा उठा रही हैं। उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए कानून ज़रूर हैं लेकिन कितने लोग इनका सहारा लेते हैं यह बताने की ज़रूरत नहीं। गुणवत्ता के मामले में जब शहरी उपभोक्ता ही उतने सचेत नहीं हो पाए हैं तो गाँव वालों से कितनी उम्मीद की जा सकती है।’

इस बारे में नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन के सदस्य जस्टिस एस. एन. कपूर का कहना हैं, ‘टीवी ने दूर-दराज़ के गाँवों तक में बहुराष्ट्रीय कंपनियों को पहुँचा दिया है। बड़ी-बड़ी कंपनियाँ विज्ञापन पर तो बेतहाशा पैसा खर्च करती हैं लेकिन उपभोक्ताओं में जागरूकता को लेकर वे चवन्‍नी खर्च करने को तैयार नहीं हैं। नकली सामान के खिलाफ़ जागरूकता पैदा करने में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थी मिलकर ठोस काम कर सकते हैं। ऐसा कि कोई प्रशासक भी न कर पाए।’

बेशक, इस कड़वे सच को स्वीकार कर लेना चाहिए कि गुणवत्ता के प्रति जागरूकता के लिहाज़ से शहरी समाज भी कोई ज़्यादा सचेत नहीं है। यह खुली हुई बात है कि किसी बड़े ब्रांड का लोकल संस्करण शहर या महानगर का मध्यया निम्नमध्य वर्गीय उपभोक्ता भी खुशी-खुशी खरीदता है। यहाँ जागरूकता का कोई प्रश्न ही नहीं उठता क्योंकि वह ऐसा सोच-समझकर और अपनी जेब की हैसियत को जानकर ही कर रहा है। फिर गाँववाला उपभोक्ता ऐसा क्योंकर न करे। पर फिर भी यह नहीं कहा जा सकता कि यदि समाज में कोई गलत काम हो रहा है तो उसे रोकने के जतन न किए जाएँ। यानी नकली सामान के इस गोरखधंधे पर विराम लगाने के लिए जो कदम या अभियान शुरू करने की ज़रूरत है वह तत्काल हो।

- हिंदुस्तान, 6 अगस्त 2006, साभार

[11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
Chapter: [11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
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प्रेमचंद की कहानी ईदगाह के हामिद और उसके दोस्तों का बाज़ार से क्या संबंध बनता है? विचार करें।

[11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
Chapter: [11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
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अपने सामान की बिक्री को बढ़ाने के लिए आज किन-किन तरीकों का प्रयोग किया जा रहा है? उदाहरण सहित उनका संक्षिप्त परिचय दीजिए। आप स्वयं किस तकनीक या तौर-तरीके का प्रयोग करना चाहेंगे जिससे बिक्री भी अच्छी हो और उपभोक्ता गुमराह भी न हो।
[11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
Chapter: [11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
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