English

Arts (English Medium) Class 11 - CBSE Question Bank Solutions

Advertisements
[object Object]
[object Object]
Subjects
Popular subjects
Topics

Please select a subject first

Advertisements
Advertisements
< prev  1681 to 1700 of 9259  next > 

कबीर की दृष्टि में ईश्वर एक है। इसके समर्थन में उन्होंने क्या तर्क दिए हैं?

[11] हम तौ एक एक करि जांनां, संतों देखत जग बौराना
Chapter: [11] हम तौ एक एक करि जांनां, संतों देखत जग बौराना
Concept: undefined >> undefined

मानव शरीर का निर्माण किन पंच तत्वों से हुआ है?

[11] हम तौ एक एक करि जांनां, संतों देखत जग बौराना
Chapter: [11] हम तौ एक एक करि जांनां, संतों देखत जग बौराना
Concept: undefined >> undefined

Advertisements

जैसे बाढ़ी काष्ट ही काटै अगिनि न काटै कोई।
सब घटि अंतरि तूँही व्यापक धरै सरूपै सोई॥

इसके आधार पर बताइए कि कबीर की दृष्टि में ईश्वर का क्या स्वरूप है?

[11] हम तौ एक एक करि जांनां, संतों देखत जग बौराना
Chapter: [11] हम तौ एक एक करि जांनां, संतों देखत जग बौराना
Concept: undefined >> undefined

कबीर ने अपने को दीवाना क्यों कहा है?

[11] हम तौ एक एक करि जांनां, संतों देखत जग बौराना
Chapter: [11] हम तौ एक एक करि जांनां, संतों देखत जग बौराना
Concept: undefined >> undefined

कबीर ने ऐसा क्यों कहा है कि संसार बौरा गया है?

[11] हम तौ एक एक करि जांनां, संतों देखत जग बौराना
Chapter: [11] हम तौ एक एक करि जांनां, संतों देखत जग बौराना
Concept: undefined >> undefined

कबीर ने नियम और धर्म का पालन करनेवाले लोगों की किन कमियों की ओर संकेत किया है?

[11] हम तौ एक एक करि जांनां, संतों देखत जग बौराना
Chapter: [11] हम तौ एक एक करि जांनां, संतों देखत जग बौराना
Concept: undefined >> undefined

अज्ञानी गुरुओं की शरण में जाने पर शिष्यों की क्या गति होती है?

[11] हम तौ एक एक करि जांनां, संतों देखत जग बौराना
Chapter: [11] हम तौ एक एक करि जांनां, संतों देखत जग बौराना
Concept: undefined >> undefined

बाह्याडंबरों की अपेक्षा स्वयं (आत्म) को पहचानने की बात किन पंक्तियों में कही गई है? उन्हें अपने शब्दों में लिखें।

[11] हम तौ एक एक करि जांनां, संतों देखत जग बौराना
Chapter: [11] हम तौ एक एक करि जांनां, संतों देखत जग बौराना
Concept: undefined >> undefined

अन्य संत कवियों नानक, दादू और रैदास आदि के ईश्वर संबंधी विचारों का संग्रह करें और उन पर एक परिचर्चा करें।

[11] हम तौ एक एक करि जांनां, संतों देखत जग बौराना
Chapter: [11] हम तौ एक एक करि जांनां, संतों देखत जग बौराना
Concept: undefined >> undefined

कबीर के पदों को शास्त्रीय संगीत और लोक संगीत दोनों में लयबद्ध भी किया गया है। जैसे- कुमारगंधर्व, भारती बंधु और प्रहलाद सिंह टिपाणिया आदि द्वारा गाए गए पद। इनके कैसेट्स अपने पुस्तकालय के लिए मँगवाएँ और पाठ्यपुस्तक के पदों को भी लयबद्ध करने का प्रयास करें।

[11] हम तौ एक एक करि जांनां, संतों देखत जग बौराना
Chapter: [11] हम तौ एक एक करि जांनां, संतों देखत जग बौराना
Concept: undefined >> undefined

मीरा कृष्ण की उपासना किस रूप में करती हैं? वह रूप कैसा है?

[12] मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई, पग घुँघरू बाधि मीरां नाची
Chapter: [12] मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई, पग घुँघरू बाधि मीरां नाची
Concept: undefined >> undefined

भाव व शिल्प सौंदर्य स्पष्ट कीजिए –

"अंसुवन जल सींचि-सचि, प्रेम-बेलि बोयी
अब त बेलि फैलि गई, आणंद-फल होयी"

[12] मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई, पग घुँघरू बाधि मीरां नाची
Chapter: [12] मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई, पग घुँघरू बाधि मीरां नाची
Concept: undefined >> undefined

भाव व शिल्प सौंदर्य स्पष्ट कीजिए –

"दूध की मथनियाँ बड़े प्रेम से विलोयी
दधि मथि घृत काढ़ि लियो, डारि दयी छोयी"

[12] मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई, पग घुँघरू बाधि मीरां नाची
Chapter: [12] मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई, पग घुँघरू बाधि मीरां नाची
Concept: undefined >> undefined

लोग मीरा को बावरी क्यों कहते हैं?

[12] मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई, पग घुँघरू बाधि मीरां नाची
Chapter: [12] मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई, पग घुँघरू बाधि मीरां नाची
Concept: undefined >> undefined

"विस का प्याला राणा भेज्या, पीवत मीरां हाँसी" - इसमें क्या व्यंग्य छिपा है?

[12] मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई, पग घुँघरू बाधि मीरां नाची
Chapter: [12] मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई, पग घुँघरू बाधि मीरां नाची
Concept: undefined >> undefined

मीरा जगत को देखकर रोती क्यों हैं?

[12] मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई, पग घुँघरू बाधि मीरां नाची
Chapter: [12] मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई, पग घुँघरू बाधि मीरां नाची
Concept: undefined >> undefined

कल्पना करें, प्रेम प्राप्ति के लिए मीरा को किन-किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा होगा।

[12] मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई, पग घुँघरू बाधि मीरां नाची
Chapter: [12] मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई, पग घुँघरू बाधि मीरां नाची
Concept: undefined >> undefined

लोक-लाज खोने का अभिप्राय क्या है?

[12] मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई, पग घुँघरू बाधि मीरां नाची
Chapter: [12] मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई, पग घुँघरू बाधि मीरां नाची
Concept: undefined >> undefined

मीरा ने ‘सहज मिले अविनासी’ क्यों कहा है?

[12] मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई, पग घुँघरू बाधि मीरां नाची
Chapter: [12] मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई, पग घुँघरू बाधि मीरां नाची
Concept: undefined >> undefined

"लोग कहै, मीरां भइ बावरी, न्यात कहै कुल-नासी" - मीरा के बारे में लोग (समाज) और न्यात (कुटुंब) की ऐसी धारणाएँ क्यों हैं?

[12] मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई, पग घुँघरू बाधि मीरां नाची
Chapter: [12] मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई, पग घुँघरू बाधि मीरां नाची
Concept: undefined >> undefined
< prev  1681 to 1700 of 9259  next > 
Advertisements
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×