Theorems and Laws [1]
डीएनए आनुवंशिक पदार्थ है, इसे सिद्ध करने हेतु अपने प्रयोग के दौरान हर्षे व चेस ने डीएनए व प्रोटीन के बीच कैसे अंतर स्थापित किया?
हर्षे व चेस ने डीएनए को आनुवंशिक पदार्थ सिद्ध करने हेतु 32P व 32P समस्थानिक युक्त माध्यम, में ई.कोलाई जीवाणु का संवर्धन कराया। कुछ समय वृद्धि करने के पश्चात् जीवाणु को जीवाणुभोजी द्वारा संक्रमित कराया गया। संक्रमण के पश्चात् देखा गया कि जीवाणुभोजी का प्रोटीन आवरण 35S विकिरण सक्रिय युक्त हो गया था जबकि इसके डीएनए में सल्फर नहीं होता। इसके विपरीत जीवाणुभोजी के डीएनए में 32P विकिरण सक्रिय समस्थानिकों की उपस्थिति दिख रही थी क्योंकि डीएनए में फॉस्फोरस होता है। प्रोटीन आवरण में 32P अनुपस्थित था। 32P विकिरण सक्रिय युक्त जीवाणुभोजी द्वारा ऐसे जीवाणु को संक्रमित कराया गया जिसमें विकिरण सक्रिय तत्त्व नहीं थे। संक्रमण के पश्चात् देखा गया कि समस्त जीवाणु विकिरण सक्रिय हो गये थे। अधिकांश विकिरण सक्रिय समस्थानिकों को जीवाणुभोजी की अगली पीढ़ी में भी स्थानांतरित कर दिया गया।
विकिरण सक्रिय तत्वों से रहित जीवाणुओं को 35S युक्त जीवाणुभोजी से संक्रमित करने और फिर जीवाणुभोजी को अलग करने पर, यह देखा गया कि विकिरण सक्रिय तत्व बैक्टीरिया में स्थित नहीं थे, बल्कि ये जीवाणुभोजी के प्रोटीन आवरण में बने रहे। उपरोक्त प्रयोग सिद्ध करता है कि जीवाणुभोजी का डीएनए ही वह पदार्थ है जो नये जीवाणुभोजी उत्पन्न करता है व संक्रमण में भाग लेता है। यह सिद्ध हो गया कि डीएनए आनुवंशिक पदार्थ है, प्रोटीन नहीं। इसके अतिरिक्त डीएनए फॉस्फोरस युक्त होता है जबकि प्रोटीन में फॉस्फोरस नहीं होता है। डीएनए सल्फर रहित होता है, जबकि प्रोटीन, सल्फर युक्त होता है।

